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किन्नौर में कडू की खेती और संरक्षण से आजीविका सुधार पर मंथन

निचार में हैंड-होल्डिंग सपोर्ट, कौशल विकास एवं मार्केटिंग पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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किन्नौर में कडू की खेती और संरक्षण से आजीविका सुधार पर मंथन
-निचार में हैंड-होल्डिंग सपोर्ट, कौशल विकास एवं मार्केटिंग पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन
-हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने जाइका वानिकी परियोजना से जुड़े समूहों को किया जागरूक


रिकांगपिओ। 18/June/2026

जिला किन्नौर में कडू की खेती और संरक्षण से आजीविका सुधार पर मंथन हुआ। वीरवार को वन मंडल किन्नौर के अंतर्गत वन परिक्षेत्र निचार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला द्वारा जाईका जड़ी बूटी सेल हिमाचल प्रदेश वन विभाग से वित्तपोषित परामर्श परियोजना के तहत  कडू औषधीय पौधे उगाने, संरक्षण एवं मार्केटिंग हेतु हैंडहोल्डिंग एवं कौशल विकास विषय पर निगानी एवं निचार के  सामान्य हित समूह के सदस्यों, निचार क्षेत्र का फील्ड स्टाफ एवं स्थानीय महिला समूहों केें 55 लोगों ने भाग लिया । हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान के प्रशिक्षण समन्वयक एवं परामर्श परियोजना अन्वेषक डॉ. जोगिंदर सिंह चौहान ने कहा कि इसका उद्देश्य सामान्य हितधारक समूहों को कडू को उगाने के बारे में हैंड होल्डलिंग स्पोर्ट एवं कौशल विकास करना है।  सामान्य हितधारक समूह के सदस्य  जड़ी-बूटी प्रकोष्ठ जाइका वानिकी परियोजना और हिमालयन वन अनुसंधान के तकनीकी सहयोग से कडु को उगा रहे है।
उन्होंने कहा कि 19 जून को निगानी एवं निचार के  सामान्य हित समूह के सदस्यों का फील्ड का दौरा करवाया जाएगा जहां पर कडु को उगाने के बारे मे हेंड होल्डिंग दी जाएगी और इसके उगाने से संबन्धित आ रही दिक्कतों के निवारण हेतु सुझाव दिए जाएंगे। डॉ. चौहान ने निचार क्षेत्र  में उगाने वाले महत्वपूर्ण औषधीय पौधे  जैसे कि वन ककड़ी, निहानी, चोरा, कुठ इत्यादि की पहचान, उपयोग और महत्व के बारे में व्यख्यान दिया । इसके अतिरिक्त उन्होने मिशन लाइफ के बारे मे भी बताया जिसमे ऊर्जा बचत और एकल प्लास्टिक उपयोग न करने  के बारे मे विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य वक्ता, डॉ. संदीप शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं समूह  समन्वयक अनुसंधान ने जड़ी बूटियों के उगाने से संबंधित समस्याओं पर प्रकाश डाला।  उन्होंने कहा कि जड़ी बूटियों का उनके प्राकृतिक आवास से दोहन अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा है, जिससे बहुत सी जड़ी बूटियां लुप्त होने के कगार पर हैं।  उन्होंने कडू की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी । कडू के एक पौधे से अधिक पौधे तैयार करने की मैक्रोप्रोलिफरेशन विधि के बारे में  अवगत करवाया और इसके लिए उचित प्रकार के खेत अथवा पौधारोपण क्षेत्र चुनने और संभावित दिक्कतों से निदान पाने के लिए प्रमुख सावधानियां सुझाई।
डॉ. रणजीत कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान द्वारा किए गए शोध कार्यों  के बारे में एवं  किन्नौर जिले की जैव विविधता के बारे में प्रस्तुति दी। जाइका वानिकी परियोजना की ओर से सीएम शर्मा, सेवानिवृत वन मंडल अधिकारी ने  कहा कि जाइका जड़ी बूटी सेल किसानों के साथ सहयोग के लिए सदैव तत्पर है।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान से श्याम सुंदर, जाइका वानिकी परियोजना से विषय वस्तु विशेषज्ञ राधिका नेगी,  एफटीयू प्रियंका नेगी,  वन खंड अधिकारी  निचार सुख राम फील्ड स्टाफ भी उपस्थित रहे।


 

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