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उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मृदा एवं जल संरक्षण अधिकारियों ने किया CPRI शिमला का भ्रमण

ICAR-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में जानीं उन्नत आलू उत्पादन तकनीकें; कुफरी फार्म और संग्रहालय का भी किया अवलोकन

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VIDYA SAGAR-02/08/2026

शिमला। उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के 27 मृदा एवं जल संरक्षण अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI), शिमला का विशेष अध्ययन भ्रमण किया। इस शैक्षणिक दौरे का मुख्य उद्देश्य उन्नत आलू अनुसंधान, टिकाऊ उत्पादन तकनीकों तथा नवीनतम कृषि प्रसार गतिविधियों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करना था।

यह अध्ययन भ्रमण भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित 131वें अधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था, जिसका नेतृत्व संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामा पाल ने किया।



कृषि प्रसार व आधुनिक तकनीकों पर चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत में सामाजिक विज्ञान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने प्रतिनिधिमंडल का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने संस्थान के ऐतिहासिक महत्व, शोध उद्देश्यों और देश में आलू अनुसंधान के क्षेत्र में इसकी अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला।

डॉ. कुमार ने संस्थान द्वारा संचालित क्षमता विकास कार्यक्रमों, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (Frontline Demonstrations), डिजिटल परामर्श सेवाओं और विभिन्न राज्यों के साथ मिलकर चलाए जा रह कृषि प्रसार अभियानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा:-

“वैज्ञानिक नवाचारों और आधुनिक तकनीकों को धरातल पर किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना ही CPRI की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

डॉ. आलोक कुमार (अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान प्रभाग)


जलवायु-अनुकूल खेती और गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन

संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने अधिकारियों को CPRI की संगठनात्मक संरचना, प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा भविष्य के अनुसंधान लक्ष्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने:

  • उच्च पैदावार व रोग प्रतिरोधी किस्मों का सफलतापूर्वक विकास किया है।

  • जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) आलू उत्पादन प्रणालियाँ तैयार की हैं।

  • गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, फसल संरक्षण, कृषि यंत्रीकरण और कटाई-उपरांत प्रबंधन में अभूतपूर्व योगदान दिया है।

निदेशक ने रेखांकित किया कि इन शोध प्रयासों से न केवल स्वस्थ बीज आलू की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी संबल मिला है।



कुफरी फार्म का दौरा व अनुभव साझा

अध्ययन भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने CPRI के प्रसिद्ध कुफरी फार्म और संग्रहालय का अवलोकन किया। यहाँ उन्होंने आलू प्रजनन (Potato Breeding), बीज उत्पादन और फसल सुधार से संबंधित प्रायोगिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने CPRI के वैज्ञानिकों के साथ टिकाऊ फसल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर गहन मंथन किया।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से आए प्रतिभागी अधिकारियों ने CPRI की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ सीखी गई तकनीकें उनके संबंधित राज्यों में जल व मृदा संरक्षण तथा कृषि विकास कार्यक्रमों को और अधिक व्यावहारिक व प्रभावी बनाने में बेहद मददगार साबित होंगी। यह दौरा सतत कृषि विकास के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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