झंडूता कॉलेज से साइंस और मैथ्स हटाने पर बवाल: सड़कों पर उतरे छात्र और अभिभावक, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
'रैशनलाइजेशन' के फैसले पर भड़का स्थानीय जनता का गुस्सा; युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का लगाया आरोप

06/06/2026-VIDYA SAGAR
झंडूता (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले राजकीय महाविद्यालय झंडूता में इन दिनों माहौल काफी गर्माया हुआ है। सरकार द्वारा कॉलेज से विज्ञान (Science) और गणित (Maths) जैसे महत्वपूर्ण विषयों/संकायों को हटाए जाने के फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर बेहद तेज हो गए हैं। इस निर्णय के विरोध में छात्र, अभिभावक और नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं।
‘तार्किक व्यवस्थापन’ के नाम पर शिक्षा से समझौता क्यों?
मिली जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग द्वारा तथाकथित ‘रैशनलाइजेशन’ (तार्किक व्यवस्थापन) नीति के तहत झंडूता कॉलेज से इन विषयों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। स्थानीय जनता और छात्र संगठनों का आरोप है कि यह ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करने की एक सोची-समझी साजिश है। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान उन गरीब परिवार के मेधावी छात्रों को होगा, जो बाहर जाकर पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
नवनिर्वाचित जिला परिषद और स्थानीय नेताओं ने खोला मोर्चा
इस आंदोलन को धार देने के लिए स्थानीय नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। नेताओं का साफ कहना है कि:
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झंडूता एक ग्रामीण और दूरदराज का इलाका है, जहाँ के बच्चों के लिए यह कॉलेज ही एकमात्र सहारा है।
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विज्ञान और गणित जैसे बुनियादी विषयों को हटाकर कॉलेज को केवल नाम का कॉलेज बनाया जा रहा है।
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यदि सरकार ने इस जनविरोधी फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में उग्र चक्का जाम और क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।
अभिभावकों की चिंता: कहाँ जाएंगे हमारे बच्चे?
प्रदर्शन में शामिल भावुक अभिभावकों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को जिला मुख्यालय बिलासपुर या अन्य बड़े शहरों में भेजने की आर्थिक स्थिति में नहीं हैं। सरकार के इस एक फैसले ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के सपनों पर पानी फेर दिया है।



