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बेंगलुरु: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने ‘वेद आगम संस्कृत महापाठशाला’ का किया दौरा; वैदिक विरासत के संरक्षण को सराहा

आर्ट ऑफ लिविंग परिसर स्थित गुरुकुल में विद्यार्थियों से किया संवाद, सोमनाथ मंदिर में टेका मत्था; नई पीढ़ी को सनातनी संस्कारों से जोड़ने पर दिया जोर

VIDYA SAGAR

बेंगलुरु | [16/05/2026]

मुख्य समाचार: भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज बेंगलुरु स्थित ‘वेद आगम संस्कृत महापाठशाला’ (श्री श्री गुरुकुलम) का दौरा किया। आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर के वैदिक हेरिटेज परिसर में स्थित इस संस्थान में पहुँचने पर राज्यपाल ने प्राचीन भारतीय परंपराओं के जीवंत रूप का अवलोकन किया।



गुरुकुल के विद्वानों और विद्यार्थियों से संवाद

दौरे के दौरान राज्यपाल ने गुरुकुल के युवा विद्यार्थियों और प्रकांड विद्वानों के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्साह और वेदों के प्रति उनके समर्पण को देख प्रसन्नता व्यक्त की। राज्यपाल ने कहा:-

“भारत की असली पहचान उसकी प्राचीन वैदिक विरासत में निहित है। यह देखकर अत्यंत हर्ष होता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमारी नई पीढ़ी अपनी जड़ों और पवित्र सनातनी संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है।”



श्री श्री रवि शंकर के प्रयासों की प्रशंसा

राज्यपाल ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और श्री श्री रवि शंकर की दूरदर्शिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अद्वितीय पारंपरिक शिक्षण केंद्र की स्थापना और इसका निरंतर सफल संचालन समाज को एक नई दिशा दे रहा है।


संस्थान की प्रमुख विशेषताएं:

  • सरकारी मान्यता: यह महापाठशाला कर्नाटक सरकार, कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सहयोग से संचालित है।

  • प्रमुख विषय: यहाँ वेद पाठन, आगम शास्त्र और संस्कृत भाषा का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।



सोमनाथ मंदिर में लिया आशीर्वाद

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने परिसर में स्थित भव्य और पवित्र सोमनाथ मंदिर में शीश नवाया और भगवान सोमनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि परिसर का आध्यात्मिक वातावरण विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए एक दिव्य ऊर्जा प्रदान करता है।


विरासत का संरक्षण: आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग

महापाठशाला के वरिष्ठ शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें संस्थान के विशेष पाठ्यक्रम से अवगत कराया। राज्यपाल ने अंत में कहा कि ऐसे गुरुकुल ही हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।


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