भाखड़ा बांध आधुनिक भारत की दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण, वैश्विक ऊर्जा संकट में जल प्रबंधन जरूरी: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता
एशिया के सबसे बड़े ग्रेविटी बांध का राज्यपाल ने किया दौरा; टर्बाइनों और विद्युत स्टेशनों का निरीक्षण कर जांची बिजली उत्पादन की क्षमता।

21/05/2026-VIDYA SAGAR
बिलासपुर / नंगल: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर निर्मित ऐतिहासिक भाखड़ा बांध का विस्तृत दौरा किया। एशिया के सबसे बड़े ग्रेविटी बांधों में शुमार और स्वतंत्र भारत की इंजीनियरिंग विरासत के इस बेजोड़ प्रतीक पर पहुंचने पर भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुख्य अभियंता सीपी सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
दौरे के दौरान राज्यपाल ने बांध की विशाल संरचना के भीतर स्थापित टर्बाइनों और बिजली उत्पादन स्टेशनों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे इंजीनियरिंग और रखरखाव कर्मचारियों की तकनीकी विशेषज्ञता और उनके समर्पण की जमकर सराहना की।

लाखों लोगों की ‘लाइफलाइन’ है भाखड़ा बांध
अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में राज्यपाल को बांध की वर्तमान परिचालन स्थिति, जल भंडारण स्तर, बिजली उत्पादन क्षमता और सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। भाखड़ा बांध की महत्ता को रेखांकित करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा:-
“भाखड़ा बांध आधुनिक भारत के निर्माताओं की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प का एक जीवंत प्रमाण है। यह बांध दशकों से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लाखों लोगों के लिए एक जीवनरेखा (Lifeline) के रूप में काम कर रहा है। यहाँ से मिलने वाला पानी और बिजली हमारे कृषि व औद्योगिक तंत्र की रीढ़ हैं।”

ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए जिम्मेदार जल प्रबंधन का आह्वान
वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने और भारत को ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिम्मेदार जल प्रबंधन और जल संरक्षण को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

राज्यपाल ने पेशेवर प्रतिबद्धता के साथ देश की इस रणनीतिक और अमूल्य बुनियादी ढांचा संपत्ति की देखरेख करने के लिए भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की तकनीकी टीम की पीठ थपथपाई। इस विशेष दौरे के अवसर पर बीबीएमबी और लोक भवन के कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व तकनीकी अधिकारी भी उपस्थित रहे।



