मुख्यमंत्री के तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर राजनीति छोड़ रहे कांग्रेसी दिग्गज: जयराम ठाकुर
"न सीएम मंत्रियों की सुनते हैं, न अधिकारी"; नेता प्रतिपक्ष का सुक्खू सरकार पर तीखा हमला, कांगड़ा जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस की करारी हार पर भी घेरा

VIDYA SAGAR-20/07/2026
शिमला, संवाददाता।
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हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी एक तीखे बयान में राज्य की सुक्खू सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के साथ सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने राज्य में ‘व्यवस्था के पतन’ और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है। ठाकुर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के तानाशाही रवैये और अपमानजनक कार्यशैली की वजह से कांग्रेस के कई बड़े और दिग्गज नेता सक्रिय राजनीति से किनारा कर रहे हैं।
“मंत्रियों को जनमंचों पर पीना पड़ रहा अपमान का घूंट”
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के भीतर चल रहे कथित अंतर्विरोधों को उजागर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री न तो अपने मंत्रियों की सुन रहे हैं और न ही विधायकों की। स्थिति यह हो चुकी है कि प्रशासनिक अधिकारी भी अपने मंत्रियों के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं, जिससे विवश होकर मंत्रियों को मीडिया के सामने अपना रोना रोना पड़ रहा है।
जयराम ठाकुर ने कुछ गंभीर उदाहरण देते हुए कहा:
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अधिकारियों को दूर रहने के निर्देश: जब भी कोई मंत्री किसी क्षेत्र के आधिकारिक दौरे पर जाता है, तो अधिकारियों को जानबूझकर उस क्षेत्र से दूर रहने के निर्देश दिए जाते हैं।
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उद्घाटन से रोकना: कई मौकों पर मंत्रियों को धूमधाम से तय परियोजनाओं का उद्घाटन करने से ऐन वक्त पर मंच पर ही रोक दिया गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ा।
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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में “मंत्रिमंडल पर मित्र मंडली भारी है।”

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मानसून में प्रशासनिक लापरवाही और आपदा प्रबंधन पर उठाए सवाल
जयराम ठाकुर ने मानसून के इस संवेदनशील मौसम में विशेष सतर्कता की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी मंत्रियों के दौरों में साथ आने को तैयार नहीं हैं, तो धरातल पर जनता की समस्याओं का निपटारा कैसे होगा?
पूर्व मुख्यमंत्री ने 2023 की त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि आपदा के एक साल बाद भी प्रभावित क्षेत्रों के हालात जस के तस बने हुए हैं:
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जो सड़कें और बुनियादी ढांचा टूटा था, उसे अब तक पूरी तरह ठीक नहीं किया गया।
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बिजली के उखड़े ट्रांसफार्मर और क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाएं केवल अस्थायी रूप से ही बहाल हो पाई हैं।
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प्रभावित लोगों को व्यक्तिगत तौर पर कोई ठोस वित्तीय या पुनर्वास सहायता नहीं मिली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को बहुत ताकतवर समझने वाले मंत्रियों को भी अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई करवाने के लिए मंचों से गुहार लगानी पड़ रही है, लेकिन अधिकारी उनकी एक नहीं सुन रहे।
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कांगड़ा जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस की करारी हार: “उम्मीदवार तक नहीं मिला”
सुक्खू सरकार पर राजनीतिक प्रहार करते हुए जयराम ठाकुर ने कांगड़ा जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत को कांग्रेस की बहुत बड़ी नैतिक और राजनीतिक हार बताया।
“लाख साजिशों और सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद कांग्रेस कांगड़ा जिला परिषद में अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का उम्मीदवार तक खड़ा नहीं कर सकी। यह इस बात का प्रमाण है कि जनता और जनप्रतिनिधियों का इस सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री
उन्होंने जिला परिषद कांगड़ा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सीमा चौधरी तथा उपाध्यक्ष अभिमन्यु कंवर को निर्विरोध चुने जाने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल व जनहितैषी कार्यकाल की कामना की।



