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मुख्यमंत्री सुक्खू का बड़ा भंगाल दौरा: दुर्गम क्षेत्रों के प्रति दिखा आत्मीय लगाव, राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर अंतिम छोर तक पहुँच रहा विकास

इतिहास में पहली बार बड़ा भंगाल में किसी मुख्यमंत्री का रात्रि ठहराव; 'व्यवस्था परिवर्तन' के तहत वोटों की संख्या नहीं, जनता की ज़रूरतें बनीं विकास का पैमाना

VIDYA SAGAR

बड़ा भंगाल/शिमला, 29 जून 2026

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का कांगड़ा जिले के सबसे दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में शुमार ‘बड़ा भंगाल’ का दो दिवसीय ऐतिहासिक प्रवास राज्य सरकार की संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री का यह दौरा साफ तौर पर दर्शाता है कि वर्तमान सरकार की विकास यात्रा केवल सड़कों और सुगम शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे हर एक नागरिक के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। जिन क्षेत्रों की आवाज़ वर्षों तक शिमला के सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती थी, आज मुख्यमंत्री स्वयं वहाँ पहुंचकर जनता के बीच बैठ रहे हैं और मौके पर ही उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।


Kamlo Devi

“मैं यहाँ राजनीति करने नहीं, दुख-दर्द बांटने आया हूँ”

मुख्यमंत्री ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के अपने संकल्प को धरातल पर उतारते हुए यह साबित किया है कि उनके लिए विकास का पैमाना राजनीतिक नफा-नुकसान या वोटों की संख्या नहीं है। कम आबादी वाले और राजनीतिक दृष्टि से कम प्रभाव वाले इस सुदूर क्षेत्र में पहुंचकर मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा:-

“मैं यहाँ राजनीति करने नहीं, बल्कि आपका दुख-दर्द बांटने आया हूँ।”

यह कथन उनकी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति संवेदनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।


Santosh Kumari

मुख्यमंत्री के दौरे से खिले ग्रामीणों के चेहरे

बड़ा भंगाल के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें रात्रि ठहराव करते देख स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल देखा गया:

  • कमलो देवी (स्थानीय निवासी): “मुख्यमंत्री जी के यहाँ आने से हमारे क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और विकास में भारी बढ़ोतरी होने की नई उम्मीद जगी है।”

  • रिशू राम (स्थानीय निवासी): “ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने यहाँ आकर रात काटी है। अब हमें पूरा विश्वास है कि हमारी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।”

  • संतोष कुमारी (स्थानीय निवासी): “हमने अपनी माँगें और परेशानियाँ सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखीं, जिस पर उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों को समाधान के कड़े निर्देश दिए।”



दुर्गम क्षेत्रों में ‘नाइट स्टे’ करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने सुक्खू

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू प्रदेश के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों का दौरा करने और वहाँ रात्रि प्रवास (Night Halt) करने वाले हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे इससे पहले भी कई दुर्गम इलाकों का दौरा कर चुके हैं:

जिला दौरा किए गए अत्यंत दुर्गम क्षेत्र
शिमला (Shimla) डोडरा-क्वार और कुपवी
कुल्लू (Kullu) बागा सराहन और बंजार का सरची गाँव
कांगड़ा (Kangra) बड़ा भंगाल

जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों का संतुलित विकास

कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से ही जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के सम्मान और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने अपनी इसी दूरगामी सोच के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रमों को बड़े शहरों से बाहर निकाला है:

  1. वर्ष 2023: सरकार बनने के बाद पहला राज्य स्तरीय ‘हिमाचल दिवस’ जनजातीय क्षेत्र स्पीति के काजा में मनाया गया।

  2. वर्ष 2025: राज्य स्तरीय ‘हिमाचल दिवस’ का आयोजन देश के सबसे कठिन व दुर्गम क्षेत्रों में से एक पांगी में किया गया।


Rishu Ram

 

निष्कर्ष: यही है वास्तविक व्यवस्था परिवर्तन

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के इन दौरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान सरकार के लिए प्रदेश का कोई भी गाँव, कोई भी परिवार और कोई भी नागरिक दूर नहीं है। यही ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की वास्तविक भावना है, जिसमें विकास की किरण को बिना किसी भेदभाव के प्रदेश के अंतिम छोर तक समान रूप से पहुँचाने का संकल्प साफ़ दिखाई देता है।

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