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यूपी में ‘माननीयों’ का मान: योगी सरकार का सख्त आदेश—अधिकारियों को विधायकों-सांसदों के सम्मान में छोड़नी होगी कुर्सी

प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य: अभद्रता पड़ी भारी

VIDYA SAGAR

लखनऊ | 09 मई, 2026 उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय और शिष्टाचार को लेकर नए कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, अब सरकारी कार्यालयों में सांसदों और विधायकों के आने पर अधिकारियों को न केवल अपनी सीट से उठकर उनका स्वागत करना होगा, बल्कि उनके साथ पूर्ण शिष्टाचार भी बरतना होगा।


प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य: अभद्रता पड़ी भारी

मुख्य सचिव द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी किसी जनप्रतिनिधि (सांसद/विधायक) के साथ अभद्रता करता है या निर्धारित शिष्टाचार (Protocol) का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

आदेश की मुख्य बातें:

  • सीट से उठना अनिवार्य: जब भी कोई निर्वाचित प्रतिनिधि किसी अधिकारी के कक्ष में प्रवेश करेगा, अधिकारी को सम्मानपूर्वक अपनी सीट से खड़ा होना होगा।

  • बातचीत में शालीनता: अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और सुझावों को गंभीरता और शालीनता से सुनना होगा।

  • समय पर उत्तर: सांसदों और विधायकों द्वारा भेजे गए पत्रों या पूछे गए सवालों का जवाब एक निश्चित समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य होगा।


क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत?

पिछले कुछ समय से कई विधायकों और सांसदों ने सरकार और विधानसभा के भीतर यह शिकायत दर्ज कराई थी कि जिला स्तर के अधिकारी उनकी बातों को अनसुना करते हैं और प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते। इसे ‘अफ़सरशाही’ के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा था। सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की गरिमा बनाए रखने की कोशिश है।

शासन का संदेश: जनता ही सर्वोपरि है

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यह आदेश संदेश देता है कि लोकतंत्र में जनता के प्रतिनिधि सर्वोच्च हैं। अधिकारियों का मुख्य कार्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आने वाली जन-समस्याओं का त्वरित निस्तारण करना है। इस आदेश के बाद अब जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस कप्तानों (SP) से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारियों को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा।


क्या होगी कार्रवाई?

सरकार ने चेतावनी दी है कि शिष्टाचार में चूक होने पर संबंधित अधिकारी की ‘एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट’ (ACR) में इस लापरवाही को दर्ज किया जा सकता है, जो उनके भविष्य के प्रमोशन और पोस्टिंग को प्रभावित कर सकती है।

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