सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सुक्खू सरकार की असंवैधानिक नीतियों पर करारा तमाचा: जयराम ठाकुर
'कर्मचारी विरोधी' कानून और चुनावी हलफनामे की खबरों पर भड़के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के खर्चों व कानूनी असफलताओं पर उठाए तीखे सवाल

VIDYA SAGAR-29/07/2026
शिमला — भर्ती और सेवा शर्तें कानून-2024 पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आए फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी एक कड़े बयान में सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्तियां एवं सेवा शर्तें विधेयक-2024 को असंवैधानिक घोषित कर सरकार की याचिका खारिज करना, राज्य सरकार की असंवैधानिक नीतियों पर करारा तमाचा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि धर्मशाला के शीतकालीन सत्र-2024 में भारी विरोध के बावजूद पारित कराया गया यह विधेयक कर्मचारियों के वरिष्ठता और अन्य अधिकारों को छीनने की मंशा से लाया गया था, जिसे माननीय न्यायालय ने न्याय के तराजू पर पूरी तरह असंवैधानिक पाया है।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनकी मंडली देशभर में खुद को ‘कर्मचारी हितैषी’ बताने का ढोल पीटती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों का हक मारने में कोई कसर नहीं छोड़ती।
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वरिष्ठता लाभ से वंचित करने की कोशिश: पूर्व में मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता देने का आदेश दिया था। सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई और हार मिलने के बाद दोबारा असंवैधानिक बिल ले आई।
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भविष्य की सरकारों पर देनदारियां टालना: उन्होंने कहा कि यह कानून इसलिए बनाया गया था ताकि कर्मचारियों की वित्तीय देनदारियों को आने वाली सरकारों के लिए टाल दिया जाए।
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करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची: सरकार ने अपने चहेते वकीलों पर कानूनी लड़ाई लड़ने के नाम पर प्रदेश के खजाने से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए, जिसका नतीजा शून्य रहा
- “यह सरकार एक बार नहीं, बार-बार अदालत में असंवैधानिक साबित हो चुकी है। चाहे बागी विधायकों की पेंशन रोकने का कानून हो, वाटर कमीशन का गठन हो, सीपीएस की अवैध नियुक्तियां हों या पंचायत चुनाव मामले में बार-बार मिली फटकार—सुक्खू सरकार की हर नीति असंवैधानिक साबित हुई है।”— जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष (हिमाचल प्रदेश)
संपत्ति विवाद और एफिडेविट की सच्चाई
उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स पर मुख्यमंत्री के बयानों का जवाब देते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी हर नाकामी के लिए भाजपा को कोसने की लत लग गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रिपोर्ट एक स्वतंत्र एनजीओ द्वारा तैयार की गई थी, जिसका आधार स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव के समय जमा किया गया हलफनामा (Affidavit) था। इसमें भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 का किया स्वागत
बयान के अंतिम हिस्से में नेता प्रतिपक्ष ने लोकसभा में भारी हंगामे के बीच सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 के पारित होने पर खुशी व्यक्त की।
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युवाओं के भविष्य की सुरक्षा: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उठाया गया यह कदम देश के करोड़ों मेहनती अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करेगा।
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पारदर्शिता और कड़े नियम: इस ऐतिहासिक कानून से पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता आएगी।




