स्वास्थ्य, शिक्षा और बागवानी में सरकार की विफलता उजागर; सेब उत्पादकों को नोटिस भेजने पर खड़े किए गंभीर सवाल
"कांग्रेस सरकार की नीतियों से हर वर्ग दुःखी" — नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर तीखा हमला

VIDYA SAGAR
शिमला- 09/08/2026 :
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस (सुक्खू) सरकार के कामकाज, नीतिगत निर्णयों और जनविरोधी रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। शिमला से जारी एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि राज्य में आज ऐसा कोई वर्ग नहीं बचा है जो इस सरकार के गलत, अव्यवहारिक और मनमाने फैसलों से बुरी तरह प्रभावित न हुआ हो।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रदेश की रीढ़ मानी जाने वाली बागवानी अर्थव्यवस्था—तीनों प्रमुख स्तंभ आज सुक्खू सरकार की प्रशासनिक विफलता, लापरवाही और मनमानी के कारण गहरे संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
1. स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल, बंद हुईं जनकल्याणकारी योजनाएं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है:
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योजनाओं का ठप होना: मरीजों को केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत और राज्य सरकार की हिमकेयर योजना जैसी अति-महत्वकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है।
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दवाइयों व टीकों की किल्लत: सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों तक में प्रोस्टेट कैंसर जैसे गंभीर रोगों के लिए आवश्यक टीकों की आपूर्ति ठप है।
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निजी स्टोर्स की मजबूरी: सिविल सप्लाई की दुकानों के बकाए का भुगतान न होने और बारकोड की तकनीकी खामियों के चलते गरीब मरीजों को लगभग ₹12,000 की दवाइयां निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके साथ ही, हजारों रुपये खर्च करके निजी क्लीनिकों में एमआरआई कराने की नौबत आ गई है।
2. शिक्षा क्षेत्र में भारी फीस वृद्धि से छात्रों का भविष्य अंधकारमय
शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा:
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में की गई भारी फीस वृद्धि ने गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया है।
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संग्रह फीस को वापस लेने की मांग को लेकर छात्र सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने पर विवश हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।
3. बागवानी अर्थव्यवस्था पर संकट: सेब बेचने पर दिए जा रहे नोटिस
जयराम ठाकुर ने बागवानों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश की ₹5,500 करोड़ की वार्षिक सेब अर्थव्यवस्था को सुक्खू सरकार के नए नियमों, बंदिशों और दंडात्मक कार्यप्रणाली ने तबाह कर दिया है।
“कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बागवानों को सेब के दाम खुद तय करने की गारंटी दी थी, लेकिन अब सेब बेचने पर नोटिस भेजकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।”
— जयराम ठाकुर (पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष)
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एमआईएस (MIS) के तहत उत्पीड़न: केवल 100 से अधिक बोरियां सेब बेचने वाले हजारों मेहनती बागवानों को एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार कार्यालयों में तलब किया जा रहा है। उन्हें भू-दस्तावेज और आधार कार्ड लेकर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के नोटिस थमाए जा रहे हैं।
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बकाया भुगतान अटका: वर्ष 2024-25 और 2025-26 के करीब ₹80 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अब तक अटका हुआ है।
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गनी बैग्स (बोरियों) की सीमा: पैकिंग के लिए गनी बैग खरीदने पर केवल 30 बैग की अव्यवहारिक सीमा तय कर दी गई है, जिससे उन किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है जिनके बगीचों में सैकड़ों-हजारों पेटियां सेब तैयार हैं। सरकार किसान-विरोधी रुख अपनाकर चुनिंदा सिंडिकेटों को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है।
विधानसभा से लेकर सड़कों तक आंदोलन की चेतावनी
जयराम ठाकुर ने अंत में कहा कि सुक्खू सरकार की जनविरोधी नीतियों और किसान-छात्र-मरीज विरोधी रवैये के कारण पूरे हिमाचल प्रदेश में व्यापक जन-आक्रोश पनप रहा है। यदि सरकार ने इन तानाशाही फैसलों और नोटिसों को तुरंत वापस लेकर जनता को राहत नहीं दी, तो प्रदेश भर में उग्र आंदोलन होगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन सभी मुद्दों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएगी और सरकार को जनविरोधी फैसले लेने से रोकेगी।




