हिमाचल का अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा धमाका: ओमान भेजी गई चेरी और प्लम की पहली खेप, बागवानी मंत्री ने दिखाई हरी झंडी
शिमला के प्रगतिशील किसानों के 800 किलो स्टोन फ्रूट्स हवाई मार्ग से चंडीगढ़ से रवाना; खाड़ी देशों में खुलेगा हिमाचली फलों का नया बाजार, बागवानों को मिलेंगे बंपर दाम।

VIDYA SAGAR-27/06/2026
चंडीगढ़/शिमला:
हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज चंडीगढ़ से ओमान (ओमान देश) के लिए शिमला जिले की चेरी और प्लम की पहली निर्यात खेप (First Export Consignment) को हरी झंडी दिखाकर हवाई मार्ग से रवाना किया। इस कदम से हिमाचल प्रदेश ने वैश्विक फल निर्यात के मानचित्र पर अपनी एक सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है।
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शिमला के 6 प्रगतिशील किसानों की उपज को मिला वैश्विक मंच
इस पहली अंतरराष्ट्रीय खेप में शिमला जिले के प्रसिद्ध बागवानी क्षेत्रों जड़ोल-टिक्कर एवं बागी के छह प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले फल शामिल हैं। निर्यात की गई इस खेप में:
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400 किलोग्राम चेरी
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400 किलोग्राम प्लम (स्टोन फ्रूट)
चंडीगढ़ से हवाई मार्ग (Air Cargo) के जरिए भेजने के कारण ये फल अपनी पूरी ताजगी, स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के साथ बहुत ही कम समय में विदेशी बाजारों तक पहुंच जाएंगे।

खाड़ी देश बनेंगे हिमाचली फलों के बड़े हब: जगत सिंह नेगी
इस ऐतिहासिक अवसर पर बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा:-
“मध्य-पूर्व (Middle East) और खाड़ी के देश हिमाचल प्रदेश के फलों के लिए एक बहुत बड़े और संभावनाशील निर्यात बाजार के रूप में उभर रहे हैं। यह शुरुआत प्रदेश के स्टोन फ्रूट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार खोलेगी और हमारे किसानों को उनकी मेहनत का सबसे बेहतरीन व लाभकारी मूल्य दिलवाएगी।”
बागवानी मंत्री ने प्रदेश के किसानों से आह्वान किया कि वे वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों का उत्पादन करें। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आने वाले समय में हिमाचली सेब सहित अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात का भी बड़े स्तर पर विस्तार किया जाएगा।

HPMC और APEDA का संयुक्त प्रयास, किसानों पर नहीं पड़ेगा खर्च का बोझ
इस ऐतिहासिक पहल को HPMC ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से अमलीजामा पहनाया है।
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बागवानों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए इस निर्यात से जुड़ी ग्रेडिंग, पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण (Quality Testing) और हवाई परिवहन का पूरा खर्च HPMC द्वारा APEDA के सहयोग से उठाया गया है, ताकि किसानों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
7 जून की कार्यशाला का दिखा असर:
गौरतलब है कि इसी वर्ष 7 जून को ठियोग में एपीईडीए और एचपीएमसी द्वारा स्टोन फ्रूट उत्पादकों के लिए एक संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई थी। उसी कार्यशाला में खाड़ी देशों को फल निर्यात करने का जो खाका खींचा गया था, आज वह धरातल पर सच साबित हुआ है।
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इस महत्वपूर्ण और गर्व के क्षण पर एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक (MD) डी.सी. राणा, महाप्रबंधक सनी शर्मा तथा एपीईडीए के क्षेत्रीय अधिकारी हरप्रीत सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।



