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हिमाचल की पंचायतों को सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बना रही सरकार, हर साल ₹28 लाख तक की होगी कमाई: केवल सिंह पठानिया

‘ग्रीन पंचायत योजना’ की समीक्षा बैठक में उप-मुख्य सचेतक ने दिए निर्देश; 24 में से 4 पंचायतों में बिजली उत्पादन शुरू, शाहपुर की परगोड़ पंचायत में जुलाई से प्रोडक्शन।

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27/06/2026-VIDYA SAGAR

शिमला:

हिमाचल प्रदेश को हरित राज्य बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रदेश सरकार निरंतर कड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में आज उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया की अध्यक्षता में ‘हिम ऊर्जा’ (Himurja) के आला अधिकारियों के साथ ‘ग्रीन पंचायत योजना’ की प्रगति को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में लगाए जा रहे सौर ऊर्जा संयंत्रों, विद्युत उत्पादन और आगामी योजनाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया।


हरित ऊर्जा से बढ़ेगी पंचायतों की आय और रोजगार

बैठक को संबोधित करते हुए उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार हर पंचायत को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

“ग्रीन पंचायत योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और हरित ऊर्जा से तो जोड़ा ही जा रहा है, साथ ही चरणबद्ध तरीके से ई-व्हीकल (E-Vehicle) चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, पंचायतों की आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।”

— केवल सिंह पठानिया, उप-मुख्य सचेतक



4 पंचायतों में उत्पादन शुरू, शाहपुर की परगोड़ में जुलाई से शुरुआत

बैठक में हिम ऊर्जा के अधिकारियों ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि योजना के तहत चयनित 24 पंचायतों में से अब तक 4 पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली का उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • जिला सोलन की ममलीग पंचायत

  • जिला सिरमौर की पाशमी पंचायत

  • जिला शिमला की पराली और धरेच पंचायतें

पठानिया ने विशेष रूप से जानकारी दी कि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की परगोड़ पंचायत में भी परियोजना का काम पूरा हो चुका है। ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक अनुमतियां मिलते ही जुलाई के प्रथम सप्ताह में यहां भी कमर्शियल विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा।


कमाई का गणित: अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च होगा पैसा

इस योजना का सबसे अनूठा पहलू इसका राजस्व मॉडल (Revenue Model) है। उप-मुख्य सचेतक ने बताया कि प्रत्येक 500 किलोवाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट से सालाना लगभग 8 लाख यूनिट बिजली पैदा होगी, जिससे करीब ₹28 लाख की वार्षिक आय का अनुमान है। इस कमाई का बँटवारा इस प्रकार होगा:

हिस्सेदारी (Percentage) हितधारक / लाभार्थी (Beneficiary)
25% संबंधित ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए
25% अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए
20% हिमाचल प्रदेश सरकार को
10% हिम ऊर्जा (Himurja) को
20% परियोजना के संचालन एवं रख-रखाव (O&M) के लिए

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि समाज के वंचित वर्गों की आर्थिक समृद्धि और ग्रामीण विकास को भी एक नई दिशा देगी।

इस समीक्षा बैठक में हिम ऊर्जा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कमल कांत सरोच, परियोजना निदेशक नरेंद्र चौहान सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


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