लेटस्ट न्यूजहिमाचल न्यूज

हिमाचल में जैव विविधता संरक्षण और आजीविका को मिलेगा नया आयाम: मुख्यमंत्री सुक्खू ने शुरू की ‘हाइबिस्कस’ योजना

2 लाख किसानों और 10,000 सामुदायिक समूहों को मिलेगा सीधा लाभ, योजना के लिए ₹2 करोड़ जारी

VIDYA SAGAR

शिमला, 23 जुलाई 2026

हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘हिमाचल बायोडायवर्सिटी स्टेकहोल्डर-लेड कंजर्वेशन यूनिफाइड योजना’ (HIBISCUS – हाइबिस्कस) का आधिकारिक शुभारंभ किया।

योजना के राज्यव्यापी क्रियान्वयन को गति देने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने वन विभाग को ₹2 करोड़ की शुरुआती राशि जारी कर दी है।


योजना का मुख्य उद्देश्य: प्रकृति संरक्षण के साथ आजीविका

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के जरिए पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की पुनर्बहाली, जैव विविधता का संरक्षण और जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।

शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा:-

“हाइबिस्कस योजना हिमाचल की समृद्ध जैव विविधता को बचाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा करेगी। यह पहल जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने, औषधीय पौधों को संरक्षित करने और किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।”



डिजिटल निगरानी और लागत-साझेदारी मॉडल

योजना की पारदर्शिता और दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं:

  • विशाल नेटवर्क: इस योजना से प्रदेश के लगभग 2 लाख किसान और 10,000 सामुदायिक समूह लाभान्वित होंगे।

  • त्रिपक्षीय मॉडल: योजना को सफल बनाने के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड, औद्योगिक साझेदारों और किसानों के बीच लागत-साझेदारी (Cost-sharing) मॉडल अपनाया गया है।

  • डिजिटल ट्रैकिंग: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जियो-टैग्ड (Geo-tagged) फोटो, मैदानी निरीक्षण और ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी।


पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक प्रबंधन का अद्भुत संगम

हाइबिस्कस योजना ‘राजीव गांधी वन संवर्धन योजना’ के ढांचे पर आधारित है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक प्रबंधन को स्थानीय लोगों के पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर एक स्थायी विकास मॉडल तैयार करना है।

योजना के प्रमुख कार्य क्षेत्र:

  • जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMC): स्थानीय स्तर पर समितियों को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।

  • औषधीय खेती को बढ़ावा: प्राथमिकता वाले औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, नर्सरी विकास और प्राकृतिक आवासों में सुधार किया जाएगा।

  • विविध भू-भागों का उपयोग: यह गतिविधियां वन भूमि, सामुदायिक भूमि, निजी भूमि और कृषि भूमि—सभी पर संचालित होंगी।

  • बाज़ार से जुड़ाव: किसानों को सिर्फ खेती तक सीमित न रखकर उनके उत्पादों को बाज़ार से जोड़कर न्यायसंगत लाभ वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।



वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार और संबंधित विभागों के कई उच्च अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:

  • प्रधान सचिव (तकनीकी शिक्षा): डॉ. अभिषेक जैन

  • सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन): सुशील कुमार सिंगला

  • निदेशक एवं सदस्य सचिव (HP State Biodiversity Board): पुष्पेन्द्र राणा

  • संयुक्त सदस्य सचिव: डॉ. सुरेश सी. अत्री

    तथा वन विभाग एवं जैव विविधता बोर्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

संपादकीय टिप्पणी: यह योजना पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है और हिमाचल प्रदेश को देश में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button