हिमाचल में पर्यावरण और स्वास्थ्य पर सरकार का डबल प्रहार
अवैध कटान पर सुक्खू की सख्ती, प्रदेश भर में 'मलेरिया मुक्त' अभियान

26/04/2026-VIDYA SAGAR
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश—वन भूमि से तुरंत हटें अतिक्रमण; स्कूलों और संस्थानों में ‘विश्व मलेरिया दिवस’ पर छात्रों ने ली जागरूकता की शपथ।
शिमला/धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने आज दो महत्वपूर्ण मोर्चों—पर्यावरण संरक्षण और जन-स्वास्थ्य—पर अपनी सक्रियता दिखाई। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की वन संपदा को बचाने के लिए कड़े आदेश जारी किए हैं, वहीं दूसरी ओर ‘विश्व मलेरिया दिवस’ के अवसर पर समूचे प्रदेश में स्वास्थ्य जागरूकता का बड़ा अभियान चलाया गया।
1. वनों की सुरक्षा: अतिक्रमणकारियों को मुख्यमंत्री की दो-टूक
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन विभाग और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अवैध कटान पर नकेल: सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि देवदार और अन्य कीमती पेड़ों के अवैध कटान में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
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अतिक्रमण हटाओ अभियान: वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को चिह्नित कर उन्हें तुरंत खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हिमाचल की पहचान उसके हरे-भरे जंगल हैं, और इनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
2. स्वास्थ्य अभियान: ‘मलेरिया को हराना है, हिमाचल को जिताना है’
‘विश्व मलेरिया दिवस’ के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों, महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।
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छात्रों की भागीदारी: शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर के स्कूलों में छात्रों ने रैलियां निकालीं और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं के जरिए मलेरिया के लक्षणों व बचाव के उपायों के बारे में बताया।
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संस्थानों में शपथ: स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में लोगों को अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और मच्छरों से बचाव के तरीके अपनाने की शपथ दिलाई गई।
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स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट: विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बुखार के मामलों की निगरानी करें और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करें।
निष्कर्ष
सरकार के ये दोनों कदम एक स्वस्थ और सुरक्षित हिमाचल की दिशा में मील का पत्थर माने जा रहे हैं। जहाँ वन संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, वहीं मलेरिया विरोधी अभियान से मानसून से पहले बीमारियों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।



