हिमाचल पंचायत चुनाव 2026: निर्वाचन आयोग ने कसी कमर, मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन संपन्न
31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश; निर्वाचन आयोग ने जारी की नई गाइडलाइन्स और मतगणना प्रोटोकॉल

VIDYA SAGAR
शिमला | 16 मई, 2026
मुख्य समाचार:
हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई ‘पंचायती राज संस्थाओं’ के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में आगामी 31 मई, 2026 तक चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। आयोग ने शिमला सहित विभिन्न जिलों में मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया है, जिससे चुनावी रणभेरी बजने का रास्ता साफ हो गया है।
मतदाता सूची और विशेष पुनरीक्षण
निर्वाचन आयोग के सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश के उन क्षेत्रों में जहाँ पुनर्गठन या सीमांकन का कार्य पूरा हो चुका है, वहां मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। आयोग ने सुनिश्चित किया है कि 1 जनवरी 2026 तक पात्र हुए सभी युवाओं को मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
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अंतिम प्रकाशन: शिमला और अन्य जिलों में 22 मई 2026 तक मतदाता सूचियों का निरीक्षण किया जा सकता है।
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पारदर्शिता: आयोग ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर डेटा सत्यापित करने के निर्देश दिए थे ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।
EVM और मतगणना के लिए सख्त निर्देश
चुनावों की शुचिता बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने EVM (Electronic Voting Machines) के भंडारण और सुरक्षा को लेकर कड़े प्रोटोकॉल जारी किए हैं:
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स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा: वेयरहाउस और स्ट्रॉन्ग रूम खोलने के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
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मतगणना प्रशिक्षण: आयोग ने मतगणना केंद्रों पर तैनात होने वाले अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
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आचार संहिता: चुनावी क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) को सख्ती से लागू करने के लिए जिला प्रशासन को अधिकृत किया गया है।
बिना विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों के लिए प्रोत्साहन
राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने एक अनूठी पहल के तहत उन पंचायतों के लिए विशेष अनुदान योजना (Incentive Scheme) की घोषणा की है जो निर्विरोध (Un-opposed) चुनी जाएंगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भाईचारे को बढ़ावा देना और चुनावी खर्च को कम करना है।



