दहेज की अंतहीन भूख: 1 करोड़ की शादी के बाद भी बुझ गया दीपिका का संसार, फॉर्च्यूनर और 50 लाख की मांग ने ली एक और टॉपर की जान!
ग्रेटर नोएडा से झकझोर देने वाली खबर: शिक्षा की 'टॉपर' दहेज लोभियों की बेरहमी के आगे हारी जिंदगी की जंगग्रेटर नोएडा से झकझोर देने वाली खबर: शिक्षा की 'टॉपर' दहेज लोभियों की बेरहमी के आगे हारी जिंदगी की जंग

VIDYA SAGAR
ग्रेटर नोएडा, [20/05/2026]: देश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच दहेज रूपी दानव ने एक और हंसती-खेलती बेटी की जिंदगी लील ली है। ग्रेटर नोएडा से सामने आया यह रूह कंपा देने वाला मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है, जहां बेटी की उच्च शिक्षा और योग्यता से ज्यादा उसकी शादी में मिलने वाली गाड़ियों और नकदी की कीमत लगाई जाती है।
24 वर्षीय दीपिका नागर, जो पढ़ाई में हमेशा अव्वल (टॉपर) रहीं और जिन्होंने BA, BEd जैसी उच्च डिग्रियां हासिल कर अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुने थे, आज वह हमारे बीच नहीं हैं। आरोप है कि दहेज के लालच और ससुराल पक्ष की अंतहीन मांगों के कारण दीपिका की जिंदगी का दीया हमेशा के लिए बुझ गया।
1. हैसियत से बढ़कर दिया, फिर भी खाली नहीं हुआ लालच का घड़ा
पीड़ित परिवार के मुताबिक, उन्होंने अपनी बेटी की खुशियों के लिए अपनी हैसियत से कहीं बढ़कर सब कुछ दांव पर लगा दिया था। दीपिका की शादी में करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। विदाई के समय 11 लाख रुपये नकद, लाखों रुपये के सोने के आभूषण, आलीशान फर्नीचर और चमचमाती स्कॉर्पियो गाड़ी जैसी तमाम सुख-सुविधाएं दी गई थीं। परिवार को उम्मीद थी कि उनकी लाडली अपने नए घर में राज करेगी।
लेकिन, दहेज के इन लोभी राक्षसों का पेट इतने से भी नहीं भरा। आरोप है कि शादी के कुछ ही समय बाद दीपिका को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल पक्ष की ओर से 45 से 50 लाख रुपये नकद और एक लग्जरी टोयोटा फॉर्च्यूनर (Toyota Fortuner) गाड़ी की नई मांग रख दी गई। जब यह मांग पूरी नहीं हो सकी, तो अत्याचार का वो दौर शुरू हुआ जिसका अंत एक बेहद दुखद मोड़ पर हुआ।
पुलिस जांच में जुटी, इंसाफ की गुहार (#JusticeForDeepika)
घटना के बाद से इलाके में भारी आक्रोश है। पीड़िता के परिवार ने ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें लगा दी गई हैं। सोशल मीडिया पर भी #JusticeForDeepika और #DowryCase ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
2. संपादकीय टिप्पणी: पीछे रह गए कुछ कड़वे सवाल…
दीपिका तो चली गई, लेकिन अपने पीछे इस तथाकथित आधुनिक समाज के मुंह पर कई तीखे सवाल छोड़ गई है:
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क्या दहेज की भूख कभी खत्म होती है? स्कॉर्पियो से शुरू हुआ लालच फॉर्च्यूनर तक पहुंच गया, अगर फॉर्च्यूनर भी मिल जाती तो क्या गारंटी थी कि अगली मांग किसी बंगले की नहीं होती?
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बेटियों की कीमत कौन तय कर रहा है? एक लड़की जो खुद पढ़ी-लिखी है, पैरों पर खड़ी होने के काबिल है, उसकी कीमत करोड़ों के दहेज और गाड़ियों के तराजू में क्यों तोली जाती है?
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कब जागेगा हमारा समाज? हम कब तक अपनी बेटियों की अर्थियों पर बैठकर इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खोखली बातें करते रहेंगे?
समय आ गया है कि दहेज मांगने वाले ऐसे लोभी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए और कानून इन्हें ऐसी इबरतनाक सजा दे, जिसे देखकर भविष्य में कोई भी किसी की बेटी पर हाथ उठाने या उससे सौदा करने की हिम्मत न कर सके।



