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बाहरा यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की

प्रसिद्ध ट्रांसफॉर्मेशनल मनोवैज्ञानिक डॉ. शिखा सरीन ने परीक्षा के तनाव, करियर की चिंता और मानसिक मजबूती पर विद्यार्थियों का किया मार्गदर्शन।

19/05/2026-VIDYA SAGAR

वाकनाघाटबाहरा यूनिवर्सिटी ने अपने छात्र कल्याण विभाग (DSW) के माध्यम से आज परिसर में विद्यार्थियों के लिए “भावनात्मक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन” विषय पर एक अत्यंत प्रभावशाली और उपयोगी कार्यशाला का सफल आयोजन किया।



“स्वयं को जानो – अपने भीतर देखो, बेहतर जीवन जियो” की प्रेरक थीम पर आधारित इस विशेष सत्र का संचालन देश की प्रसिद्ध ट्रांसफॉर्मेशनल मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डॉ. शिखा सरीन द्वारा किया गया। डॉ. सरीन ने युवाओं के बीच भावनात्मक संतुलन, आत्म-जागरूकता, तनाव प्रबंधन और मानसिक मजबूती (मेंटल रेजिलिएंट) विकसित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए।



शैक्षणिक दबाव के बीच एक सामयिक पहल

यह कार्यशाला एक ऐसे संवेदनशील समय पर आयोजित की गई है, जब देश भर में बोर्ड और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। इस दौर में अक्सर छात्र-छात्राएं यूनिवर्सिटी प्रवेश, करियर के विकल्पों और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर अत्यधिक तनाव, चिंता और असमंजस का सामना करते हैं।

विद्यार्थियों की इन्हीं समस्याओं का समाधान करते हुए डॉ. सरीन ने उन्हें व्यावहारिक टिप्स दिए:

  • भावनात्मक दबाव को कैसे संभालें और अपने भीतर के आत्म-संदेह (Self-doubt) को कैसे दूर करें।

  • कठिन और अनिश्चित समय में भी सकारात्मक सोच (Positive Mindset) कैसे बनाए रखें

  • जीवन और करियर से जुड़े बड़े फैसले लेते समय अपने भीतर आत्मविश्वास कैसे जगाएं



शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी

इस विशेष अवसर पर बोलते हुए बाहरा यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण निदेशक (Director – Student Welfare) श्री अनुराग अवस्थी ने कहा कि भावनात्मक स्वास्थ्य विद्यार्थी जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे शिक्षा और करियर के समान ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

“आज के युवाओं पर पढ़ाई, परिवार व समाज की अपेक्षाओं, कड़ी प्रतिस्पर्धा और भविष्य के नियोजन का भारी दबाव रहता है। ऐसे में जीवन के हर क्षेत्र में समग्र सफलता हासिल करने के लिए मानसिक मजबूती और भावनात्मक संतुलन बेहद जरूरी हैं।” – श्री अनुराग अवस्थी


विद्यार्थियों के साथ अपने सक्रिय जुड़ाव और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए पहचाने जाने वाले श्री अवस्थी ने आगे कहा कि बाहरा यूनिवर्सिटी हमेशा से परिसर में एक सकारात्मक, सहयोगी और प्रेरणादायक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध रही है, जहाँ हर विद्यार्थी की बात सुनी जाए और उसे सही मार्गदर्शन मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के सत्रों से छात्रों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और चुनौतियों के प्रति एक स्वस्थ दृष्टिकोण विकसित होता है।


विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

इस इंटरैक्टिव सत्र के दौरान विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यशाला ने कैंपस में एक बेहद सकारात्मक और ऊर्जावान माहौल तैयार किया, जिसने विद्यार्थियों को खुलकर अपनी बात रखने का मंच दिया। सत्र के समापन पर सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ अपने मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य को भी पूरी प्राथमिकता देंगे।


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