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कैब ड्राइवर से लेकर सिल्वर स्क्रीन तक: अभिनेता सुनील कुमार के संघर्ष और सफलता की कहानी

हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर के लड़के ने कैसे आर्थिक तंगी, डिलीवरी जॉब और लगातार मिलने वाले रिजेक्शन्स को मात देकर बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की।

24/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला: फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध अक्सर उस कड़े संघर्ष को छुपा देती है जो वहां तक पहुँचने के लिए जरूरी होता है। सुनील कुमार के लिए सिल्वर स्क्रीन का रास्ता किसी थाली में सजाकर नहीं मिला था, बल्कि इसे उन्होंने अपनी अटूट मेहनत से खुद बनाया है। स्विगी में खाना डिलीवर करने से लेकर उबर-रैपिडो में कैब चलाने तक, सुनील की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

शिमला की खूबसूरत वादियों में जन्मे सुनील की जड़ें आज भी अपने गाँव-कस्बे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई सोलन, परवाणू और बाद में चंडीगढ़ से पूरी की। एक बेहद साधारण परिवार में पले-बढ़े सुनील ने बचपन से ही कड़ी मेहनत और दृढ़ता का महत्व सीख लिया था।



प्रेरणा के दो मजबूत स्तंभ

सुनील को मेहनत करने का जज्बा अपने पिता से विरासत में मिला, जो हिमाचल प्रदेश में होम गार्ड की सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद एक ड्राइवर के रूप में काम करने लगे और साथ ही अपना एक छोटा सा कैब बिजनेस भी संभाला। हालांकि, सुनील की सबसे बड़ी ताकत उनकी दिवंगत मां, श्रीमती रेखा देवी थीं। उनकी मां के त्याग, अटूट विश्वास और हिम्मत ने ही सुनील को हर मुश्किल घड़ी में अपने सपनों के पीछे भागने का हौसला दिया।



संघर्ष के दिन: मेहनत और लगन की मिसाल

मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने से पहले, सुनील ने अपने परिवार को संभालने और अपने अभिनय के सपने को जिंदा रखने के लिए कई तरह के काम किए। उनके काम का अनुभव किसी को भी हैरान कर सकता है:

  • कस्टमर सपोर्ट: उन्होंने इंटरनेशनल और डोमेस्टिक कॉल सेंटर्स में काम किया, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) में पंजाबी और हिंदी भाषी कॉल संभालना शामिल था।

  • गिग इकोनॉमी: उन्होंने स्विगी (Swiggy) के साथ जुड़कर डिलीवरी बॉय के रूप में शहरों की सड़कों पर दिन-रात खाना पहुँचाया।

  • ट्रांसपोर्ट सेक्टर: उन्होंने उबर (Uber), इनड्राइव (InDrive) और रैपिडो (Rapido) के लिए कमर्शियल ड्राइवर के तौर पर लंबी शिफ्टों में गाड़ियाँ और बाइक्स चलाईं।

  • हॉस्पिटैलिटी और सेल्स: आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए उन्होंने वेटर और सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में भी काम किया।

दिनभर की थका देने वाली नौकरियों के बाद भी सुनील ने कभी भी एक्टिंग के ऑडिशन्स देना बंद नहीं किया।



बड़ा ब्रेक: बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका

सुनील के इसी धैर्य और लगन का फल तब मिला जब उन्हें मुख्यधारा के सिनेमा से बड़े मौके मिलने लगे। उन्होंने बेहतरीन फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग से दर्शकों का ध्यान खींचा:

प्रोजेक्ट (Project) प्लेटफॉर्म / प्रकार भूमिका (Role)
अमर सिंह चमकीला नेटफ्लिक्स (निर्देशक: इम्तियाज अली) पंजाब पुलिस अधिकारी
सैम बहादुर थियेट्रिकल (सिनेमाघर) भारतीय सेना के कर्नल

वर्तमान में, सुनील स्टार प्लस / टीवी शो “गंगा माई की बेटियों” में ‘बबलू’ का किरदार निभा रहे हैं, जिसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है और उन्हें घर-घर में पहचान मिल रही है।


आगे की राह: मुख्य विलेन और लीड रोल्स

हिमाचल के इस उभरते सितारे का भविष्य बेहद शानदार नजर आ रहा है। आने वाले समय में उनकी कई बड़ी फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं:

1. चमचम (ChamCham) – बिगशॉट प्रोडक्शन

सुनील इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में सेकंड लीड (मुख्य भूमिका) के रूप में नजर आएंगे। इस प्रोजेक्ट में वे अमित चंद्रपुरिया, प्रदीप काबरा और गोपी भल्ला जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करेंगे।

2. ऊर्जा (Urja)

अपने पिछले किरदारों से बिल्कुल अलग हटकर, सुनील अपकमिंग फिल्म ‘ऊर्जा’ में मुख्य विलेन (Antagonist) के रूप में अपना खौफनाक अंदाज दिखाएंगे। इस फिल्म में वे पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के मशहूर आर्टिस्ट ‘वांटेड प्रिंस’ के अपोजिट नजर आएंगे। यह फिल्म जल्द ही रिलीज होने वाली है।


संपादक की टिप्पणी (Editor’s Note)

शिमला की तंग गलियों से निकलकर बॉलीवुड के बड़े सेट्स तक पहुँचने का सुनील कुमार का यह सफर देश के लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। यह कहानी साबित करती है कि आपकी किस्मत इस बात से तय नहीं होती कि आप कहाँ से आए हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आप कहाँ पहुँचना चाहते हैं।


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