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बिलासपुर (HP) स्पेशल रिपोर्ट: फोरलेन, एम्स और रेलवे प्रोजेक्ट्स के बाद अब पंचायती राज चुनाव में अपनी साख बचाने की जंग

गोविंद सागर के तट पर सजने लगी चुनावी चौपाल; विकास के बड़े दावों और स्थानीय बुनियादी समस्याओं के बीच बिलासपुर की जनता का मूड भांपना हुआ दिलचस्प।

30/05/2026-VIDYA SAGAR

बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश): ऐतिहासिक कहलूर रियासत की धरती और आधुनिक हिमाचल के ‘विकास हब’ कहे जाने वाले बिलासपुर जिले में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक तापमान चरम पर है। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन के चालू होने, भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे लाइन के तेज़ी से बढ़ते काम और एम्स (AIIMS) बिलासपुर की सौगात मिलने के बाद जिला भले ही वैश्विक पटल पर चमक रहा हो, लेकिन ग्रामीण स्तर पर आज भी राजनीति की एक अलग ही बिसात बिछी हुई है।

पंचायती राज संस्थाओं के त्रिकोणीय चुनावी घमासान के बीच, बिलासपुर के सदर, झंडूता, घुमारवीं और श्री नैना देवी जी विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में आज “गांव की सरकार” को लेकर चर्चाएं तेज़ हो चुकी हैं।


बिलासपुर के मुख्य मुद्दे: क्या चाहती है यहाँ की जनता?

महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलने के बावजूद, बिलासपुर की ग्रामीण जनता इस बार बेहद जमीनी और व्यावहारिक मुद्दों पर अपनी राय रख रही है:

  • विस्थापितों की स्थायी समस्याएं: भाखड़ा बांध के निर्माण के समय से चले आ रहे विस्थापितों के कुछ अनसुलझे मुद्दों और फोरलेन निर्माण के कारण प्रभावित हुए स्थानीय दुकानदारों व भूमि मालिकों का पुनर्वास आज भी यहां एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है।

  • स्वास्थ्य और शिक्षा का सुदृढ़ीकरण: हालांकि कोठीपुरा में एम्स (AIIMS) खुलने से बिलासपुर को बड़ी पहचान मिली है, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी जिला अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs/PHCs) में डॉक्टरों व आधुनिक मशीनों की कमी को दूर करने की मांग कर रहे हैं।

  • सड़कों का रखरखाव और पानी की किल्लत: गर्मियों की आहट के साथ ही बिलासपुर के कुछ ऊंचाई वाले ग्रामीण इलाकों (जैसे धार कोटला और झंडूता के कुछ क्षेत्र) में पेयजल की सुचारू आपूर्ति और संपर्क सड़कों की मरम्मत इस बार पंचायत चुनाव के केंद्र में है।


राजनीतिक समीकरण: साख बचाने की लड़ाई

बिलासपुर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष नेतृत्व और वर्तमान कांग्रेस सरकार के दिग्गजों का गृह क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में यहाँ का कोई भी स्थानीय या पंचायत स्तर का चुनाव महज एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के लिए अपनी साख और पैठ को साबित करने की परीक्षा बन जाता है।

“इस बार बिलासपुर के युवा और जागरूक मतदाता किसी राजनीतिक पार्टी के सिंबल को देखने के बजाय उम्मीदवार की साफ छवि, उसकी पहुंच और स्थानीय विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं।”


प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा

जिले में किसी भी प्रकार की चुनावी या कानून-व्यवस्था संबंधी हलचल को देखते हुए बिलासपुर जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क है। विशेषकर पंजाब सीमा से सटे श्री नैना देवी जी के सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर चौबीसों घंटे नाकेबंदी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।


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