हिमाचल के किसानों को सुक्खू सरकार का बड़ा तोहफा: बकाया कृषि लोन का 50% ब्याज देगी सरकार, टलेगी जमीनों की नीलामी
'बजट घोषणा' को अमलीजामा पहनाते हुए 'वन-टाइम सेटलमेंट नीति' को मंजूरी; ₹3 लाख तक के कर्ज पर मिलेगा लाभ, प्रदेश के 6,356 किसानों को मिलेगी सीधी राहत।

VIDYA SAGAR
शिमला, 27 जून:
हिमाचल प्रदेश के वित्तीय बोझ तले दबे किसानों के लिए आज का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया है। राज्य सरकार ने अपनी बजट घोषणा को धरातल पर उतारते हुए ‘वन-टाइम सेटलमेंट नीति’ (One-Time Settlement Policy) के तहत ‘कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना’ शुरू करने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन संकटग्रस्त किसानों की कृषि भूमि को बचाना है, जो कर्ज न चुका पाने के कारण नीलामी की कगार पर पहुंच चुकी है।
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प्रति किसान ₹3 लाख तक के लोन पर आधी ब्याज माफी
इस किसान-हितैषी योजना के तहत राज्य सरकार प्रत्येक पात्र किसान के 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करेगी। सरकार के इस कदम से राज्य के लगभग 6,356 किसानों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा। सरकार ने इस विशेष राहत योजना के लिए 50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।
इन बैंकों के माध्यम से मिलेगा फायदा
योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए सरकार ने दो प्रमुख सहकारी बैंकों को जिम्मेदारी सौंपी है:
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हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
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कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
इन बैंकों की स्थानीय शाखाएं जल्द ही पात्र किसानों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेंगी ताकि बिना किसी देरी के किसानों को ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) का लाभ दिया जा सके।
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किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़: मुख्यमंत्री सुक्खू
इस ऐतिहासिक फैसले पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा:-
“किसान हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं और उनका कल्याण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हमारे कई किसान भाई आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इसलिए सरकार ने यह एकमुश्त राहत देने का फैसला किया है ताकि किसी भी किसान की जमीन नीलाम न हो और वे सम्मान के साथ अपनी खेती जारी रख सकें।”
प्राकृतिक खेती और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल कर्ज में ही राहत नहीं दे रही, बल्कि कृषि को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए सरकार ऐतिहासिक समर्थन मूल्य (MSP) भी प्रदान कर रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और दोनों वित्तीय संस्थानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस योजना को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए ताकि पात्र किसानों को समय पर इसका लाभ मिल सके।
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