‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग प्रशस्त करेगी भविष्योन्मुखी शिक्षा: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने दिया हर शिक्षक को एक गांव गोद लेने का मंत्र
HP यूनिवर्सिटी कोर्ट की 36वीं बैठक में बड़ा फैसला: अब हर 3 महीने में होगी बैठक, पेंडिंग ऑडिट पर कसेगा शिकंजा; AI और डेटा साइंस जैसे नए युग के कोर्सेज पर जोर

VIDYA SAGAR
शिमला, 14 जुलाई 2026
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“आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को केवल एक मजबूत, समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही धरातल पर उतारा जा सकता है।” यह बात हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU), शिमला में आयोजित यूनिवर्सिटी कोर्ट की 36वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
राज्यपाल ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप उच्च शिक्षा में नवाचार (Innovation), व्यावहारिक कौशल और अनुसंधान (Research) में निरंतर सुधार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
HPU को मिली नई सौगात: हाई-टेक डिजिटल स्टूडियो का उद्घाटन
बैठक से पूर्व, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित डिजिटल स्टूडियो/एमओओसी (MOOC) रिकॉर्डिंग स्टूडियो का भव्य उद्घाटन किया। अंतरराष्ट्रीय दूरस्थ शिक्षा एवं मुक्त अधिगम केंद्र के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि यह अत्याधुनिक स्टूडियो गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा को समाज के दूर-दराज के क्षेत्रों और अधिक से अधिक शिक्षार्थियों तक पहुंचाने में गेम-चेंजर साबित होगा।

प्रशासनिक सुधार: हर 3 महीने में होगी कोर्ट की बैठक, ऑडिट आपत्तियों पर कड़ा रुख
संस्थागत जवाबदेही तय करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए:
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नियमित बैठकें: यूनिवर्सिटी कोर्ट की बैठकें अब नियमित रूप से प्रत्येक तीन माह में एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी।
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वित्तीय अनुशासन: विश्वविद्यालय में सुशासन सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। राज्यपाल ने लंबित ऑडिट आपत्तियों (Pending Audit Objections) का शीघ्र निस्तारण करने के सख्त निर्देश दिए।
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नवाचार और रोजगार पर ध्यान: AI, डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा अनिवार्य
रोजगार की चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री गुप्ता ने विश्वविद्यालय से ट्रेडिशनल ढर्रे से बाहर निकलकर कौशल आधारित शिक्षा और स्टार्ट-अप संस्कृति को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि:
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
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इन्क्यूबेशन सेंटर, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और इंटर्नशिप के जरिए युवाओं को ‘नौकरी मांगने वाला’ नहीं बल्कि ‘रोजगार प्रदाता’ (Job Provider) बनाया जाए।
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ऑनलाइन शिक्षा, वर्चुअल कक्षाओं और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर शिक्षा को समावेशी बनाया जाए।
सामाजिक जिम्मेदारी: शिक्षक गोद लेंगे एक-एक गांव
शैक्षणिक संस्थानों के सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने एक अनूठी पहल का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक शिक्षक को एक गांव गोद लेना चाहिए। शिक्षक इन गांवों में जाकर पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने में अपना अमूल्य योगदान दें।
“उच्च शिक्षा केवल तकनीकी और व्यावसायिक विषयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, सदाचार और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी समावेश होना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना बेहद जरूरी है।” — कविन्द्र गुप्ता, राज्यपाल
HPU की बड़ी उपलब्धियां: स्थापित हुए 5 नए एडवांस रिसर्च सेंटर
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने पिछले एक वर्ष की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि HPU ने अनुसंधान क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 5 अत्याधुनिक केंद्र स्थापित किए हैं:
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ग्रीन एनर्जी एवं नैनो टेक्नोलॉजी केंद्र
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साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र
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पहाड़ी संस्कृति एवं विरासत केंद्र
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हिमालयन सेंटर फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड रेजिलिएंस
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रामानुजन सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स एंड इंडियन मैथेमेटिक्स

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विधायक सुरेश कुमार कार्यकारी परिषद के सदस्य चुने गए
यूनिवर्सिटी कोर्ट की इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सफल क्रियान्वयन की भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान विधायक सुरेश कुमार को सर्वसम्मति से कार्यकारी परिषद (Executive Council) का सदस्य चुना गया।
इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा और चंद्र शेखर ने भी विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। बैठक की कार्यवाही का सफल संचालन रजिस्ट्रार ज्योति राणा द्वारा किया गया, जबकि मंच पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद रहे।



