एचपीएमसी निदेशक मंडल की 222वीं बैठक आयोजित निगम के आधुनिकीकरण, डिजिटल सुधार और वाणिज्यिक विस्तार से संबंधित लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय
हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) के निदेशक मंडल की 222वीं बैठक आज राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

8 अक्तूबर, 2026
(Viren Thakur)
बैठक में निगम के विभिन्न ऑपरेशनल, वाणिज्यिक एवं विकासात्मक विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई। निदेशक मंडल ने एचपीएमसी को और अधिक सुदृढ़ बनाने, प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए नए एवं व्यापक मार्केट अवसर विकसित करने तथा राज्य के फल उत्पादकों एवं बागवानों को अधिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों को स्वीकृति दी।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण एवं उन्नयन पर विशेष बल दिया। इसका उद्देश्य प्रसंस्करण दक्षता में सुधार, उत्पादों की गुणवत्ता एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना तथा उपलब्ध आधारभूत संरचना का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत एचपीएमसी के उत्पादों के प्रचार-प्रसार, ब्रांडिंग एवं विपणन को भी सुदृढ़ किया जाएगा जिससे घरेलू बाजार के साथ-साथ उभरते हुए नए बाजारों में निगम की उपस्थिति को विस्तार मिल सकेगा। इस परियोजना पर लगभग 1.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
बैठक में एचपीएमसी खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र, पराला में एप्पल सनैप्स संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई। इसका उद्देश्य प्रदेश में उत्पादित सेब के बेहतर उपयोग, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन के लिए अतिरिक्त अवसर सृजित करना है।
यह परियोजना प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था से जुड़े वाणिज्यिक तंत्र को और मजबूत करने के साथ-साथ बागवानी उपज के विविध एवं बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत 8.19 करोड़ रुपये है।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर कियोस्क स्थापित करने संबंधी नई नीति को भी स्वीकृति प्रदान की। इससे एचपीएमसी के उत्पादों की अधिक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने और निगम की ब्रांड वैल्यू को बढ़ावा मिलेगा।
नई कियोस्क नीति के माध्यम से एचपीएमसी के उत्पादों के विपणन के लिए अतिरिक्त चैनल विकसित किए जाएंगे। साथ ही, उपयुक्त स्थानों पर कियोस्क स्थापित कर निगम के उत्पादों को नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने तथा ‘एचपीएमसी’ ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलवाने के प्रयास किए जाएंगे।
निदेशक मंडल ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत किए जा रहे सुधारों तथा एचपीएमसी की कार्यप्रणाली के आधुनिकीकरण की भी समीक्षा की।
इस अवसर पर बागवानों से संबंधित रिकॉर्ड एवं प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया गया। बैठक में एमआईएस सपोर्ट प्राइस में एक प्रति रुपये किलोग्राम की बढ़ोतरी के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया कि गया जिससे फल उत्पादकों और बागवानों को अतिरिक्त सहायता मिली है।
बागवानों से संबंधित रिकॉर्ड एवं प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित एवं सुलभ बनाने के लिए एचपीएमआईएम वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई।
डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किसानों एवं बागवानों के व्यक्तिगत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने एवं उनके सुव्यवस्थित रख-रखाव की सुविधा उपलब्ध हुई है। इससे उनके मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, दक्ष एवं त्वरित बनी है। यह प्रणाली भविष्य में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को सुगम बनाने के साथ-साथ पारंपरिक मैनुअल रिकॉर्ड-रखरखाव पर निर्भरता को कम करने में भी सहायक होगी।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि निगम द्वारा की जा रही डिजिटल पहल का मूल उद्देश्य किसानों एवं बागवानों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के अधिक सुविधा एवं सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही, इन पहलों के माध्यम से एचपीएमसी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी, जवाबदेही एवं कार्यकुशलता को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी की निष्क्रिय एवं कम उपयोग में लाई जा रही परिसंपत्तियों तथा सुविधाओं के मॉनेटाइजेशन और उनके अधिकतम उपयोग संबंधी प्रस्ताव की भी समीक्षा की। ऐसी परिसंपत्तियों को उत्पादक एवं व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार किया गया। विशेष रूप से मुंबई, चेन्नई एवं कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से इन परिसंपत्तियों के प्रभावी उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हुई।
इस पहल का उद्देश्य निगम के लिए अतिरिक्त राजस्व सृजित करना, परिसंपत्तियों के उपयोग की दक्षता बढ़ाना तथा निष्क्रिय आधारभूत ढांचे के रख-रखाव से जुड़े वित्तीय भार को कम करना है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी सभी व्यवस्थाओं में एचपीएमसी के व्यावसायिक एवं संस्थागत हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के उत्पादों के निर्यात को देश के व्यापक बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक विस्तारित करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा की।
इस दिशा में उपयुक्त बाजारों की पहचान, उत्पादों की प्रभावी ब्रांड पोजिशनिंग, विपणन रणनीति को सुदढ़ करने तथा मार्केटिंग एवं निर्यात संपर्क-संबंध विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य एचपीएमसी के उत्पादों की बाजार क्षमता को बढ़ाना तथा निगम के लिए नए व्यावसायिक अवसरों का सृजन करना है।
उद्योग मंचों, बिजनेस मीट्स एवं अन्य संबंधित आयोजनों में एचपीएमसी की सक्रिय भागीदारी से निगम को व्यापक ब्रांड प्रचार, व्यावसायिक नेटवर्किंग, नए बाजार संपर्क, संभावित व्यापारिक साझेदारियों तथा नए वाणिज्यिक अवसरों की तलाश के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध होंगे।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि एचपीएमसी द्वारा की जा रही सभी पहलों का अंतिम उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में अधिक मूल्यवर्धन, बेहतर बाजार पहुंच और व्यापक व्यावसायिक अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए, ताकि इनका प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालिक लाभ प्रदेश के किसानों एवं बागवानों तक पहुंच सके।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी को एक आधुनिक, व्यावसायिक रूप से सक्षम, दक्ष एवं किसान-बागवान केंद्रित संगठन के रूप में विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके लिए निगम की उपलब्ध आधारभूत संरचना का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग, प्रसंस्करण एवं विपणन क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण, डिजिटल तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाना तथा देश-विदेश के नए बाजारों की संभावनाओं का निरंतर अन्वेषण किया जाएगा।
बैठक में एचपीएमसी उपाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सचिव बागवानी सी.पॉलरासू, प्रबन्ध निदेशक डी.सी. राणा, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, निदेशक बागवानी सतीश कुमार और निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।



