राज्यपाल ने विज्ञान, नवाचार और समाज के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने का किया आह्वान
विकसित भारत के निर्माण की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है विज्ञानमय भारत-विकसित भारत: राज्यपाल

10 अक्तूबर 2026
(Viren Thakur)
एनआईटी हमीरपुर में शिक्षा महाकुंभ अभियान 6.0 को किया संबोधित
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और समाज की आवश्यकताओं के बीच समन्वय को मजबूत करने का आह्वान किया है।
राज्यपाल ने आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ अभियान के छठे संस्करण को संबोधित किया। इस अभियान में संस्करण का विषय विज्ञानमय भारत-विकसित भारत है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का आधार वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की संस्कृति, नवाचार और वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों से तीव्र गति से बदलाव हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समग्र, बहुविषयक और कौशल-आधारित शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, संवाद कौशल तथा समस्या समाधान की क्षमताओं का विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक के उपभोक्ता बनने के बजाय नई तकनीकों के सृजक और नवाचारकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
अनुसंधान से समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को इंगित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक खोजों और तकनीकी प्रगति का लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होना चाहिए, दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को सहायता मिलनी चाहिए तथा जल एवं ऊर्जा संरक्षण, आपदा प्रबंधन के सुदृढ़ीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय स्तर पर उपयोगी, किफायती और टिकाऊ तकनीकों के विकास पर बल दिया।
राज्यपाल ने कहा कि विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप, उद्योगों और समाज को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति को नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों से निर्देशित किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, कौशल और चरित्र का विकास करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रकृति के साथ बेहतर संतुलन स्थापित करने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा महाकुंभ 6.0 ज्ञान से नवाचार, नवाचार से समाधान और समाधान से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सार्थक योगदान देगा।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एच. एम. सूर्यवंशी, आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, विद्या भारती (उत्तर क्षेत्र) के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार नड्डा, डिपार्टमेंट ऑफ होलिस्टिक एजुकेशन के निदेशक प्रो. (डॉ.) ठाकुर सुदेश कुमार रौनिया, शिक्षा महाकुंभ अभियान के संयोजक मेजर (डॉ.) शमशेर सिंह एवं अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।



