“अपशब्दों से समाधान नहीं, भटके हुए युवाओं को सही राह दिखाना ही समय की मांग”: पीएम मोदी
जंतर-मंतर की घटना पर प्रधानमंत्री का संवेदनशील रुख; युवाओं को माफ कर राष्ट्र निर्माण में एकजुट होकर योगदान देने का किया आह्वान

VIDYA SAGAR-02/08/2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा है कि अपशब्दों और कटुता से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने समाज से भटके हुए युवाओं का मार्गदर्शन करने, उन्हें सही राह दिखाने और राष्ट्र के विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया है।
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी संदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब देश तेजी से प्रगति कर रहा है, तो ऐसे समय में युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल होना अत्यंत आवश्यक है।
“भूल से सीखने और सुधारने की आवश्यकता”
हाल ही में जंतर-मंतर पर हुई घटना और अपने व अपनी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया ने इस आचरण को देखा है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसी घटनाओं को लेकर समाज में आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन हमें मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा:-
“बचपन और युवावस्था का समय ऐसा होता है जब गलतियाँ हो जाती हैं, लेकिन यही समय सीखने और खुद में सुधार करने का भी अवसर होता है। भटके हुए बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाने या सामाजिक उत्पीड़न का शिकार बनाने के बजाय, हमें उन्हें गले लगाना चाहिए और सही रास्ता दिखाना चाहिए।”
— नरेन्द्र मोदी (प्रधानमंत्री)
क्षमा की भावना और राष्ट्र के लिए एकजुटता
प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे ऐसे युवाओं को दिल से क्षमा करना चाहते हैं। उन्होंने समाज से भी आग्रह किया कि वे आक्रोश छोड़ इस क्षमा और सुधार की भावना को स्वीकार करें।
उन्होंने युवाओं से अपनी गलतियों से सबक लेते हुए देश की प्रगति में भागीदार बनने और अपने सपनों को पूरा करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की प्रगति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक युवा सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री का विशेष वीडियो संदेश
युवाओं का सही मार्गदर्शन करने का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने मुख्य चार बातें रेखांकित कीं:
-
“अपशब्दों से कभी समाधान नहीं निकलता।”
-
“आइए, गुमराह लोगों का मार्गदर्शन करें।”
-
“आइए, एकजुट होकर प्रयास करें।”
-
“आइए, भारत के लिए कार्य करें।”
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का यह वक्तव्य केवल एक राजनीतिक या प्रशासनिक बयान नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और समाज के लिए एक गहरा नैतिक संदेश है। यह पहल भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें देश के नवनिर्माण से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगी।




