CPRI शिमला में राष्ट्रीय दक्षता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
देश भर के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों को दिया जा रहा 'बीज आलू उत्पादन की मानक संचालन प्रक्रियाओं' का व्यावहारिक प्रशिक्षण

VIDYA SAGAR-02/08/2026
शिमला। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI), शिमला में “बीज आलू उत्पादन हेतु आधारभूत मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs)” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय दक्षता विकास कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ।
27 से 29 जुलाई तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों में स्थित CPRI के ब्रीडर सीड (प्रजनक बीज) उत्पादन केन्द्रों से आए वैज्ञानिक और तकनीकी कार्मिक भाग ले रहे हैं।
ब्रीडर बीज: संपूर्ण बीज उत्पादन प्रणाली की आधारशिला
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ब्रीडर बीज आलू के उत्पादन में वैज्ञानिक एकरूपता, आनुवंशिक शुद्धता, गुणवत्ता और मानकीकरण को सुदृढ़ बनाना है। ब्रीडर बीज उत्पादन CPRI की प्रमुख वैज्ञानिक जिम्मेदारियों में से एक है, जो पूरे देश की आलू बीज प्रणाली की मजबूत नींव तैयार करता है।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रजनक बीज उत्पादन केन्द्रों में मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

वैज्ञानिक उत्कृष्टता और दूरदर्शी नेतृत्व पर बल
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए ICAR-CPRI शिमला के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा:-
“वैज्ञानिक दृढ़ता, खेत व प्रयोगशाला स्तर पर मानकीकृत कार्यप्रणालियों और निरंतर क्षमता संवर्धन से ब्रीडर बीज प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। ब्रीडर बीज की गुणवत्ता व शुद्धता बनाए रखना न केवल किसानों को विश्वसनीय बीज उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है, बल्कि अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान की साख बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।”
— डॉ. ब्रजेश सिंह (निदेशक, ICAR-CPRI शिमला)
उन्होंने आगे कहा कि नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को तैयार करने और शोध में निरंतरता बनाए रखने के लिए व्यवस्थित दक्षता विकास, ज्ञान साझाकरण (Knowledge Sharing) और उचित मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और एकरूपता की पहल
कार्यक्रम निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों को ब्रीडर बीज आलू उत्पादन से जुड़ी SOPs पर विस्तृत सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे देश भर के उत्पादन केन्द्रों की कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी और किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाला बीज आसानी से पहुँच सकेगा।
समन्वय एवं प्रमुख उपस्थिति
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डॉ. विनोद कुमार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जबकि डॉ. ध्रुव कुमार, डॉ. अश्वनी शर्मा एवं डॉ. तनुजा बक्सेठ कार्यक्रम के समन्वयक हैं।
उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. सोम दत्त, डॉ. विनय सागर, डॉ. कैलाश नागा सहित संस्थान के कई अधिकारी व देश भर से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।




