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हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: जलाशयों में मत्स्य आखेट पर रॉयल्टी घटाकर की मात्र 1 प्रतिशत

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मछुआरों को दी ऐतिहासिक राहत; गोबिंद सागर, पोंग बांध और कोल बांध सहित 6,500 परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ

04/06/2026-VIDYA SAGAR

शिमला। हिमाचल प्रदेश के जलाशयों से अपनी आजीविका चलाने वाले हजारों मछुआरा परिवारों के हित में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने जलाशयों से होने वाले मत्स्य आखेट (Fishing) पर लगने वाली रॉयल्टी दर को 7.5 प्रतिशत से भारी कटौती करते हुए मात्र 1 प्रतिशत करने का फैसला किया है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार ने मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पिछले वर्ष भी इस रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया था, जिसे अब न्यूनतम स्तर पर ला दिया गया है।


📈 हाइलाइट्स: सरकार के फैसले के मुख्य बिंदु

  • ऐतिहासिक कटौती: मत्स्य आखेट पर रॉयल्टी अब 7.5% से घटकर हुई सिर्फ 1%।

  • 6,500+ परिवारों को लाभ: गोबिंद सागर, पोंग बांध, चमेरा, रंजीत सागर और कोल बांध के मछुआरों को मिलेगी सीधी आर्थिक राहत।

  • ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा: ग्रामीण युवाओं के लिए मत्स्य पालन बनेगा अधिक टिकाऊ और आकर्षक आजीविका विकल्प।

  • आधुनिक बुनियादी ढांचा: मछली अवतरण केन्द्रों का विकास और बेहतर मार्केटिंग लिंकेज किए जाएंगे मजबूत।


🐟 मछुआरों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

इस जनहितैषी निर्णय पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार नीतिगत बदलावों, बुनियादी ढांचे के विकास और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के माध्यम से मछुआरों की आय दोगुनी करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

“पुरानी रॉयल्टी व्यवस्था का प्रतिकूल प्रभाव मछुआरा सहकारी समितियों और व्यक्तिगत मछुआरों की कमाई पर पड़ रहा था। रॉयल्टी को 1 प्रतिशत करने से उनकी शुद्ध लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे जलाशय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने में मदद मिलेगी और राज्य की उभरती हुई ‘ब्लू इकोनॉमी’ को नया प्रोत्साहन मिलेगा।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री


🚀 मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए उठाए जा रहे कदम

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल रॉयल्टी कम करना ही सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि इस पूरे सेक्टर को आधुनिक बनाया जा रहा है। इसके लिए विभाग निम्नलिखित कार्य कर रहा है:

  1. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: राज्य के प्रमुख जलाशयों के पास आधुनिक मछली अवतरण केन्द्रों (Fish Landing Centers) का विकास किया जा रहा है।

  2. गुणवत्ता नियंत्रण: मछलियों को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए मछुआरों को ‘आइस बॉक्स’ उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

  3. मार्केटिंग सपोर्ट: विपणन सम्पर्कों (Marketing Linkages) को मजबूत किया जा रहा है ताकि मछली उत्पादों के बेहतरीन और उचित दाम मिल सकें।


📢 जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश

मुख्यमंत्री सुक्खू ने मत्स्य विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस संशोधित और उदार नीति का लाभ राज्य के प्रत्येक पंजीकृत मछुआरे तक समय पर पहुँचना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विभाग को जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है ताकि सभी मछुआरा परिवार इस योजना का पूरा लाभ उठा सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपना मजबूत योगदान दे सकें।


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