बॉर्डर पर बढ़ता तनाव: क्या हिमाचल प्रदेश में एंट्री पर लगेगा नया ‘टैक्स’? पंजाब और हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों में छिड़ा नया विवाद
हिमाचल सरकार के टैक्स नियमों और बैरियर व्यवस्था को लेकर सीमा पर बढ़ी तनातनी; स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स ने जताई चिंता, प्रशासन अलर्ट।

VIDYA SAGAR
बिलासपुर/ऊना | 4 जून, 2026
हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमाओं पर पिछले कुछ दिनों से टैक्स और एंट्री बैरियर को लेकर उपजा विवाद अब एक नया मोड़ लेता जा रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में “खालसा टैक्स” या “विशेष बॉर्डर टैक्स” के नाम से चल रही चर्चाओं ने सीमावर्ती इलाकों में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर सरकार द्वारा ऐसा कोई नया टैक्स लागू नहीं किया गया है, लेकिन हिमाचल में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगने वाले ग्रीन टैक्स, पैसेंजर एंड गुड्स टैक्स (PGT) और टोल टैक्स को लेकर पंजाब के ट्रांसपोर्टर्स और हिमाचल आबकारी विभाग के बीच तनातनी चरम पर है।
इस विवाद के चलते बिलासपुर के स्वारघाट, ऊना के मैहतपुर और आनंदपुर साहिब से सटे बॉर्डर पर मालवाहक वाहनों (ट्रकों) की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है
क्या है पूरा मामला और क्यों उठा यह विवाद?
असल में, यह पूरा विवाद हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों से आने वाले कमर्शियल वाहनों पर सख्ती से टैक्स वसूलने और कुछ जगहों पर टैक्स की दरें बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ है।
पंजाब के ट्रांसपोर्टर्स का विरोध:
पंजाब के ट्रक ऑपरेटरों और धार्मिक यात्रियों (जो कीरतपुर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब के रास्ते हिमाचल के शक्तिपीठों में आते हैं) का आरोप है कि हिमाचल की सीमाओं पर उनसे जबरन और अत्यधिक टैक्स वसूला जा रहा है। इंटरनेट और स्थानीय स्तर पर इसी विवाद को लेकर कुछ संगठन इसे “जबरन टैक्स” या “खालसा क्षेत्र के लोगों पर टैक्स” (प्रतीकात्मक रूप से आनंदपुर साहिब बेल्ट के कारण) कहकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
- हिमाचल प्रदेश आबकारी एवं कराधान विभाग (Excise and Taxation Dept) का स्पष्ट कहना है कि यह कोई नया या विशेष टैक्स नहीं है। यह राज्य के स्थापित नियमों के तहत लिया जाने वाला नियमित एंट्री और गुड्स टैक्स है, जिसे राज्य के राजस्व (Revenue) को बढ़ाने के लिए अब पूरी तरह डिजिटल और सख्त कर दिया गया है।
व्यापारियों का बयान:
“अगर बॉर्डर पर इसी तरह गाड़ियों को रोका गया और टैक्स विवाद नहीं सुलझा, तो हिमाचल में राशन, सीमेंट और निर्माण सामग्री की सप्लाई ठप हो जाएगी, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।” — सतीश कुमार, स्थानीय ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
सीमा पर सुरक्षा और चेकिंग बढ़ाई गई
विवाद को देखते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस और पंजाब पुलिस दोनों ही अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में अलर्ट पर हैं। बिलासपुर और ऊना के पुलिस अधीक्षकों ने सीमावर्ती चौकियों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी संभावित चक्का जाम या हिंसक प्रदर्शन को रोका जा सके।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
इस विवाद का आर्थिक असर:
3 मुख्य बिंदु प्रभावित क्षेत्र संभावित असर
पर्यटन (Tourism) पंजाब और दिल्ली से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आ सकती है।
सप्लाई चेन (Logistics) पंजाब से हिमाचल आने वाली हरी सब्जियों, दूध और राशन की गाड़ियों की आवाजाही पर ब्रेक लग सकता है।
राजस्व (State Revenue) यदि ट्रांसपोर्टर्स ने हड़ताल की, तो हिमाचल सरकार को रोजाना लाखों रुपये के टैक्स का नुकसान होगा।
आगे क्या? प्रशासन की बैठकें जारी
सूत्रों के मुताबिक, इस गतिरोध को खत्म करने के लिए हिमाचल प्रदेश के आबकारी अधिकारियों और पंजाब के ट्रांसपोर्ट यूनियनों के बीच जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है। हिमाचल सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि टैक्स चोरी भी न हो और बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं व व्यापारियों को किसी भी तरह के मानसिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।



