हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: हरित पंचायतों की आय का 25% अब अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर होगा खर्च
पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक सरोकार: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संशोधित राजस्व मॉडल को दी मंजूरी, 100 ग्राम पंचायतों में लगेंगे सौर ऊर्जा प्लांट।

VIDYA SAGAR
विशेष ब्यूरो, शिमला 4 जून 2026
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक कल्याण को जोड़ने की दिशा में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य की ‘हरित पंचायत’ (Green Panchayat) पहल अब न केवल प्रदेश को हरित राज्य बनाने में योगदान देगी, बल्कि गांवों के अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के उत्थान का जरिया भी बनेगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस अभिनव योजना के तहत राजस्व वितरण (Revenue Distribution) मॉडल में बड़े संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए भेजा जाएगा।
राजस्व का नया मॉडल: किसे कितना मिलेगा हिस्सा?
राज्य सरकार के नए फैसले के मुताबिक, इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश की 100 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की भूमि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाएं (Solar Power Projects) स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं से होने वाली कुल आय को निम्नलिखित पांच हिस्सों में बांटा जाएगा:
| हिस्सेदार | आवंटित राजस्व (%) | उद्देश्य / कार्य |
| सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग | 25% | संबंधित ग्राम पंचायत के अनाथों और विधवाओं को वित्तीय सहायता |
| संबंधित ग्राम पंचायत | 25% | गांव के अन्य विकास कार्यों के लिए |
| राज्य सरकार | 20% | सरकारी राजस्व कोष |
| हिमऊर्जा (Himurja) | 20% | परियोजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव (O&M) के लिए |
| हिमऊर्जा (Himurja) | 10% | एजेंसी के लाभांश/प्रबंधन के रूप में |
सुख आश्रय योजना: 6,000 अनाथ बच्चों को मिल रहा संबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। इसी कड़ी में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना’ के तहत राज्य के लगभग 6,000 अनाथ बच्चों की शिक्षा, देखभाल और समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।
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इस योजना के तहत प्रत्येक अनाथ बच्चे को 4,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
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जिन पात्र लाभार्थियों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें मकान निर्माण के लिए मुफ्त भूमि और वित्तीय सहायता दी जा रही है।
### विधवा महिलाओं और उनके बच्चों को मिला सम्मान का जीवन
महिलाओं के सशक्तिकरण पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार विधवाओं को सम्मान और सुरक्षा का जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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विधवा महिलाओं को पक्का मकान बनाने के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
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इसके साथ ही, विधवाओं के बच्चों को उच्च शिक्षा (Higher Education) प्राप्त करने के लिए सरकार पूरा आर्थिक सहयोग दे रही है, ताकि वे भी समाज में समान अवसरों पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
“हमारी सरकार का मुख्य ध्येय समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करना है। हरित पंचायतों से होने वाली आय से अनाथ बच्चों और विधवाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे वे एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी सकेंगे।”
— ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
समावेशी और सतत विकास की अनूठी मिसाल
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल सरकार का यह कदम देश के लिए एक रोल मॉडल साबित हो सकता है। यह योजना न केवल रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के जरिए कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगी, बल्कि इससे पैदा होने वाले पैसे का इस्तेमाल सीधे तौर पर ग्रामीण स्तर पर ही मानवीय कल्याण के लिए होगा। यह ‘समावेशी और सतत विकास’ (Inclusive and Sustainable Development) का एक बेहतरीन उदाहरण है।



