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नगर निकाय चुनावों में हार से बौखलाई भाजपा लगा रही झूठे आरोप: नरेश चौहान

आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों को बताया निराधार; पूर्व भाजपा सरकारों का रिकॉर्ड सामने रख याद दिलाया इतिहास; केंद्रीय आपदा राशि न मिलने पर दागे सवाल।

26/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज यहाँ एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए विपक्षी दल भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का निराधार आरोप लगाने वाली भाजपा असल में नगर निकायों के चुनाव में अपनी करारी शिकस्त से बौखला गई है और इसी हताशा में बेतुकी बयानबाजी कर रही है।

नरेश चौहान ने भाजपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि लोक भवन और मीडिया के समक्ष कांग्रेस सरकार पर उंगली उठाने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।


‘आचार संहिता के दौरान बैठकें भाजपा के समय भी हुईं’

नरेश चौहान ने ऐतिहासिक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आचार संहिता के मध्य मंत्रिमण्डल की बैठकें आयोजित करना कोई नई बात नहीं है और पूर्ववर्ती सरकारों में भी ऐसा होता रहा है:

  • जय राम ठाकुर का कार्यकाल: वर्ष 2020-21 के पंचायत चुनावों के दौरान 21 दिसम्बर 2020 से 22 जनवरी 2021 तक आचार संहिता लागू थी, फिर भी जयराम सरकार ने 23 दिसम्बर 2020 और 5 जनवरी 2021 को दो बार कैबिनेट बैठकें कीं।

  • प्रो. प्रेम कुमार धूमल का कार्यकाल: 7 दिसम्बर 2010 को पंचायत चुनावों की आचार संहिता के बीच तत्कालीन भाजपा सरकार ने कैबिनेट बैठक बुलाई थी।

  • वीरभद्र सिंह का कार्यकाल: कांग्रेस सरकार के समय भी 5 दिसम्बर और 19 दिसम्बर 2005 को आचार संहिता के दौरान बैठकें हुई थीं।

उन्होंने साफ किया कि हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में कोई भी नई घोषणा या नई योजना लागू करने का निर्णय नहीं लिया गया है। ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के तहत पहले से ही लाहौल-स्पीति, कुपवी, किलाड़ और पांगी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। इसके अलावा, मानदेय बढ़ोतरी का प्रावधान भी बजट में पहले से ही तय था।


बैलट पेपर से हुआ चुनाव, जनता ने दिखाया आईना

नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों का जिक्र करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि इन चुनावों के परिणाम पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में रहे हैं, जिसकी भाजपा के पांचों गुटों ने कभी उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने कहा:-“पंचायतीराज संस्थानों के चुनाव बैलट पेपर पर हुए हैं और नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। यदि देश में लोकसभा चुनाव भी ईवीएम के स्थान पर बैलट पेपर से करवाए जाएं, तो वहाँ भी कांग्रेस ही विजयी बनकर उभरेगी।”


हिमाचल के हक और केंद्रीय सहायता पर उठाए गंभीर सवाल

प्रधान सलाहकार ने आरोप लगाया कि जब हिमाचल प्रदेश को सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय वित्तीय सहायता की जरूरत थी, तब राज्य के भाजपा नेताओं ने प्रदेश हित की पैरवी करने के बजाय केंद्रीय सहायता को रुकवाने के प्रयास किए। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से सीधे सवाल पूछे:

  1. ₹1500 करोड़ की घोषणा का क्या हुआ?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मशाला आकर आपदा राहत के लिए 1500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन वह राशि आज तक हिमाचल को नहीं मिली।

  2. 2023 की आपदा राहत: वर्ष 2023 में आई भीषण आपदा के नुकसान की भरपाई के लिए भी केंद्र से राज्य को कोई वित्तीय मदद नहीं मिल पाई है।

  3. मौन क्यों है विपक्ष?: जीएसटी (GST) और राजस्व घाटा अनुदान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रदेश भाजपा नेताओं ने कितनी बार केंद्र के समक्ष हिमाचल का पक्ष रखा?


शिक्षा, स्वास्थ्य और नशा मुक्ति में ऐतिहासिक सुधार

सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है:

  • शिक्षा क्षेत्र: सीबीएसई स्कूल खोलने, अंग्रेजी माध्यम शुरू करने, राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल की स्थापना और बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती से शिक्षा के स्तर को आधुनिक बनाया गया है।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र: राज्य में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की गई है और करीब 3000 करोड़ रुपये के निवेश से 18-20 साल पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदला जा रहा है।

  • नशे के खिलाफ जंग: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में ‘एंटी चिट्टा वॉकथॉन’ जैसी पहलों से समाज और युवाओं में सामूहिक चेतना जागृत हुई है और नशे के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है।


महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्र को घेरा

नरेश चौहान ने अंत में देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय जब कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल था, तब पेट्रोल 60-65 रुपये लीटर मिलता था, लेकिन आज कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से कम होने पर भी पेट्रोल 100 रुपये के पार है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम जनता महंगाई की मार झेल रही है और युवा बेरोजगारी से परेशान हैं, जिससे जनता में भारी रोष है।


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