बदलाव की बयार: हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों ने लिखी विकास की नई इबारत
लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर में बुनियादी ढांचे का ऐतिहासिक विस्तार; डिजिटल कनेक्टिविटी से लेकर 'लखपति दीदी' और सौर ऊर्जा तक दिखा सुक्खू सरकार का विजन

VIDYA SAGAR
शिमला, 19 जुलाई, 2026

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में विषम भौगोलिक परिस्थितियों और हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद विकास की एक नई सुबह देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया है। शिक्षा, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के साधनों का विस्तार कर सरकार ने इन कठिन इलाकों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को एक नई ऊंचाई दी है।


चुनौतियों पर भारी पड़ी इच्छाशक्ति: शत-प्रतिशत बिजली और पानी
हिमाचल प्रदेश का अनुसूचित क्षेत्र राज्य के कुल क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत है, लेकिन यहां का जनसंख्या घनत्व मात्र 7 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। इस बेहद कठिन परिवेश के बावजूद राज्य सरकार ने हर मौसमी और स्थायी बस्ती में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण (Electricity) और सुरक्षित पेयजल (Drinking Water) पहुंचा दिया है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों का लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,018 महिलाएं है, जो राज्य के औसत (972) से कहीं बेहतर और गौरवशाली है।
बजट में बड़ा हिस्सा: ट्राइबल सब-प्लान (STP)
सरकार हर साल अपनी विकास योजनाओं के कुल बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा ट्राइबल सब-प्लान (एसटीपी) के लिए सुरक्षित रखती है। इसके तहत:
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वर्ष 2024-25 में: 890.28 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
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वर्ष 2025-26 में: 638.73 करोड़ रुपये जनजातीय विकास के लिए जारी किए गए।
1. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार
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मेधावियों को प्रोत्साहन: वर्ष 2025-26 में 3,361 छात्रों को प्री-मैट्रिक, 5,693 को पोस्ट-मैट्रिक और 304 मेधावियों को मेरिट स्कॉलरशिप दी गई। प्रदेश के 4 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के 1,008 छात्र आज देश के शीर्ष आईआईटी और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
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द्वार पर आधुनिक चिकित्सा: जनजातीय क्षेत्रों में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र कार्यरत हैं। विशेष रूप से लाहौल-स्पीति और भरमौर में ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ स्थापित कर वहां पहली बार एमआरआई, सीटी स्कैन और आधुनिक प्रयोगशालाएं शुरू की गई हैं।

2. आर्थिक आत्मनिर्भरता: 3,234 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 3,234 जनजातीय महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। इसके अलावा, महिलाओं को ‘इन्दिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के तहत प्रति माह 1,500 रुपये की सीधी वित्तीय सहायता दी जा रही है।
3. पांगी बना पहला ‘प्राकृतिक खेती उपमंडल’ और सौर ऊर्जा क्रांति
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रसायन-मुक्त खेती: पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। यहां प्राकृतिक रूप से उगाई गई जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है, जो किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
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स्टार्ट-अप को बढ़ावा: ‘राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना’ के तहत निजी भूमि पर 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाने के लिए 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान (Interest Subsidy) दिया जा रहा है।
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होम-स्टे योजना: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे के विस्तार हेतु 5 करोड़ रुपये तक के निवेश पर 5% ब्याज सब्वेंशन दिया जा रहा है।


4. डिजिटल नेटवर्क का जाल: गांव-गांव तक भारतनेट
डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर उतारते हुए भारतनेट परियोजना के तहत 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है। इसके माध्यम से 705 ग्राम पंचायतें सीधे डिजिटल नेटवर्क से जुड़ गई हैं, जिससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, बैंकिंग और ऑनलाइन शिक्षा अब सुदूर गांवों तक आसानी से सुलभ है।
5. ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ से कायाकल्प
इस विशेष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के 10 जिलों के 270 गांवों का चयन किया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के 17 मंत्रालयों के आपसी तालमेल से इन गांवों में हर घर नल से जल, रसोई गैस और बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास किया जा रहा है।


इतिहास में दर्ज हुआ पल:
राज्य के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार स्पीति घाटी के काजा में ‘हिमाचल दिवस’ का राज्य स्तरीय आयोजन किया गया। इसने यह साबित किया कि सुक्खू सरकार के लिए दूरदराज का हर नागरिक बेहद खास है और शासन की पहुंच अब आखिरी छोर तक हो चुकी है।



