राज्यपाल ने आधुनिक ज्ञान एवं नवाचार के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिया बल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन और युवाओं के सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम: राज्यपाल

23 अक्तूबर, 2026
(Viren Thakur)
वर्ष 2047 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की अहम भूमिका
विद्यार्थियों से पर्यावरण के जिम्मेदार संरक्षक बनने का किया आह्वान
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए आधुनिक ज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राज्यपाल ने आज डलहौजी हिलटॉप स्कूल के वार्षिक समारोह ‘विरासत-2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि विरासत का अर्थ पीढ़ी दर पीढ़ी मिले ज्ञान के साथ-साथ वर्तमान पीढ़ी के विचारों और कार्यों से होने वाला बदलाव भी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान, समस्या समाधान की क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी होना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति नवाचार, कौशल विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित कर शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए एक सशक्त रूपरेखा प्रदान कर रही है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को तभी साकार किया जा सकता है, जब देश के युवा ज्ञानवान, नवाचारी, आत्मनिर्भर, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित होंगे।
प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को इंगित करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), रोबोटिक्स, एसटीईएम शिक्षा और डिजिटल शिक्षण मंच विद्यार्थियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी इन नई प्रौद्योगिकियों से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का समावेश होना भी अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने सीबीएसई की कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम के लिए विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि में सभी के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर निवासी अक्षत कुमार को बारहवीं कक्षा में 98.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चंबा जिले में प्रथम स्थान हासिल करने पर बधाई दी। राज्यपाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अक्षत कुमार और लद्दाख निवासी अली अकबर को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने विद्यालय के संस्थापक आई.एम. धवन के योगदान को याद किया। उन्होंने युवा प्रतिभाओं को निखारने की दिशा में प्रबंध निदेशक डॉ. सुधीर धवन और चेयरपर्सन डॉ. पूनम राय धवन के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. पूनम राय धवन ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें विद्यालय के इतिहास, शैक्षणिक एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियों का विवरण दिया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सफलता का आकलन केवल अंकों या पदों से नहीं, बल्कि चरित्र, आचरण और समाज के प्रति योगदान से किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा सतत जीवनशैली अपनाकर हिमालयी पर्यावरण के जिम्मेदार संरक्षक बनने का आह्वान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक कौशल एवं ज्ञान अर्जित करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने वार्षिक समारोह के सफल आयोजन के लिए विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को बधाई दी तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री आशा कुमारी, भारतीय सेना एवं भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी, उप-मंडलाधिकारी अनिल भारद्वाज, डीएसपी मयंक शर्मा, रंजन शर्मा, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विपिन ठाकुर, डलहौजी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष डॉ. कैप्टन जी.एस. ढिल्लों, विद्यार्थियों के अभिभावक तथा क्षेत्र के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



