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विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए जनभागीदारी आवश्यक: राज्यपाल

आध्यात्मिक मार्गदर्शन से सेवा और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को मिलती है मजबूती जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी जी ने राज्यपाल को ‘देश रत्न’ सम्मान से किया सम्मानित

19 अक्तूबर, 2026

(Viren Thakur)

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज जम्मू में जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी जी के पावन समागम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराएं सदियों से आत्मिक शांति, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना का सशक्त स्रोत रही हैं। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित थी।

राज्यपाल ने समागम को संबोधित करते हुए कहा कि संतों और आध्यात्मिक गुरुओं की उपस्थिति एवं उनका मार्गदर्शन समाज को नई प्रेरणा प्रदान करता है। संत और आध्यात्मिक गुरू लोगों को करुणा, सेवा, सद्भाव, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे महान मूल्यों का स्मरण करवाते हैं।

श्री गुप्ता ने कहा कि भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत में सदैव मानवता, सेवा और सामूहिक कल्याण को सर्वाेपरि स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और सभ्यता केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन्हें भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित रखें।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत तीव्र गति से प्रगति कर रहा है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने एक स्पष्ट राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और योगदान अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, जीवन-मूल्यों और सभ्यतागत विरासत का संरक्षण भी आवश्यक है। आधुनिकता को अपनाते हुए और प्रगति के नए आयाम स्थापित करते हुए राष्ट्र को अपनी सांस्कृतिक जड़ों तथा आध्यात्मिक परंपराओं से मजबूती से जुड़े रहना चाहिए।

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राज्यपाल ने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों, पारंपरिक ज्ञान और सभ्यतागत आदर्शों को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है, ताकि देश की विकास यात्रा अपने शाश्वत मूल्यों से प्रेरित और निर्देशित होती रहे।

उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति हमेशा उसकी विविधता में एकता की भावना में निहित रही है। हमें किसी को भी विभिन्न समुदायों के बीच दरार पैदा करने या सदियों से पोषित सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से नफरत, भ्रामक सूचनाओं और समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से दूर रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी जी ने राज्यपाल को ‘देश रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया।

सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है। साथ ही, यह समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी का एक नया अध्याय भी है।

 

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