सामाजिक सुरक्षा पेंशन बनी लाखों जरूरतमंदों का सहारा, प्रदेश सरकार ने 3 वर्षों में रिकॉर्ड 99,799 नए मामलों को दी स्वीकृति
राज्य में पेंशन लाभार्थियों का आंकड़ा बढ़कर हुआ 8,41,917; वृद्धजन, विधवाएं, एकल महिलाएं और दिव्यांगजन सम्मानजनक जीवन जीने के लिए हो रहे सशक्त।

19/05/2026-VIDYA SAGAR
शिमला (ब्यूरो रिपोर्ट): प्रदेश सरकार ने समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों के चलते सामाजिक सुरक्षा पेंशन आज प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन वर्षों के भीतर प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत रिकॉर्ड 99,799 नए मामलों को मंजूरी देकर सीधे लाभार्थियों तक वित्तीय राहत पहुंचाई है।
लाभार्थियों का आंकड़ा 8.41 लाख के पार
नए मामलों को तेजी से दी गई स्वीकृतियों के बाद अब राज्य में कुल पेंशन लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 8,41,917 हो गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सरकार समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इन वर्गों को मिल रहा है सीधा लाभ:
वृद्धजन (Senior Citizens): बुढ़ापे की लाठी बनकर पेंशन उनके स्वाभिमान की रक्षा कर रही है।
विधवाएं और एकल महिलाएं: समाज की बेसहारा और एकल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
दिव्यांगजन (Specially Abled): शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे नागरिकों को दैनिक जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
जमीनी स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था का असर
विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि पिछले 3 वर्षों में पेंशन प्रक्रियाओं के सरलीकरण और डिजिटलाइजेशन के कारण पात्र लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। सीधे बैंक खातों में पेंशन राशि ट्रांसफर (DBT) होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है, जिससे जरूरतमंदों तक शत-प्रतिशत राहत समय पर पहुंच रही है।
प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दे रहा है, बल्कि राज्य में सामाजिक समरसता और जनकल्याण के एक नए युग की शुरुआत भी कर रहा है। सरकार का संकल्प है कि भविष्य में भी कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।



