सोमनाथ अमृतपर्व: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे 11 पवित्र तीर्थों के जल से मंदिर के शिखर का भव्य कुंभाभिषेक
सोमनाथ महादेव के पुनर्निर्माण के 75वें वर्ष में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव।

11/05/2026-VIDYA SAGAR
सोमनाथ (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक, प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर, अपने पुनर्निर्माण के 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘अमृतपर्व’ मना रहा है। इस पावन अवसर पर एक अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इस समारोह का मुख्य आकर्षण ‘शिखर कुंभाभिषेक’ होगा। प्रधान मंत्री मोदी स्वयं मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित कुंभ (कलश) का अभिषेक करेंगे। यह आयोजन केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक प्रतीक है।
11 पवित्र तीर्थों का जल: एक अद्वितीय संगम
कुंभाभिषेक के लिए, देश भर के 11 अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थस्थलों का जल एकत्र किया गया है। यह संगम भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को एकजुट करता है, और यह कुंभाभिषेक इस एकता का एक शक्तिशाली संदेश देगा।
इन 11 तीर्थों में निम्नलिखित स्थानों का पवित्र जल शामिल है:
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वाराणसी (काशी): भगवान शिव की नगरी से पवित्र गंगा जल।
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रामेश्वरम: दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित ज्योतिर्लिंग का जल।
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बद्रीनाथ: हिमालय के पावन तीर्थ से एकत्र जल।
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केदारनाथ: भगवान शिव के एक अन्य महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग का जल।
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द्वारका: भगवान कृष्ण की नगरी का पवित्र जल।
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जगन्नाथ पुरी: पूर्वी तट पर स्थित भगवान विष्णु के धाम का जल।
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प्रयागराज (संगम): गंगा, यमुना, और सरस्वती के पवित्र संगम का जल।
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हरिद्वार: गंगा के मैदानों में प्रवेश का पावन जल।
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नाशिक (त्र्यंबकेश्वर): गोदावरी नदी के तट पर स्थित एक और ज्योतिर्लिंग का जल।
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तिरुपति बालाजी: प्रसिद्ध वेंकटेश्वर मंदिर से लाया गया जल।
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गया: धार्मिक और पितृ-तर्पण के लिए प्रसिद्ध तीर्थ का जल।
यह कुंभाभिषेक इन सभी पवित्र जलधाराओं का सोमनाथ महादेव के शिखर पर महासंगम होगा, जो न केवल मंदिर के आध्यात्मिक महत्व को बढ़ाएगा, बल्कि देश के सभी कोनों को एक साथ लाएगा।
प्रधानमंत्री का विशेष लगाव
प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ मंदिर से गहरा और व्यक्तिगत लगाव है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सोमनाथ मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह कुंभाभिषेक उनके कार्यकाल में एक और मील का पत्थर साबित होगा, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आयोजन का महत्व
सोमनाथ मंदिर, जो कई बार आक्रमणों का शिकार हुआ और फिर से उठ खड़ा हुआ, भारत के लचीलेपन और सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रतीक है। ‘अमृतपर्व’ और यह कुंभाभिषेक केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास को याद करने और एक उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरणा लेने का अवसर है। यह आयोजन भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को भी एक नई दिशा देगा।



