हिमाचल में लागू होगी ‘सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति’: हर प्रोजेक्ट के 5 चरणों में होगी सुरक्षा की जांच, ₹1 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स में 1% बजट आरक्षित
दुर्घटनाओं में 6.48% की कमी के बावजूद सरकार का बड़ा फैसला; PWD में बनेगा समर्पित 'रोड सेफ्टी सेल'

VIDYA SAGAR
शिमला, 23 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक कदम उठाया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज किए जाने के बावजूद, सरकार ने सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली सभी सड़कों के लिए ‘सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति’ (Road Safety Audit Policy) को मंजूरी दे दी गई है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में सड़कों की योजना, डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव के हर स्तर पर सुरक्षा को अनिवार्य घटक बनाना है।
पहाड़ी राज्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार नीति
हिमाचल प्रदेश जैसे दुर्गम पर्वतीय राज्य में तीखे मोड़, प्रतिकूल मौसम और कठिन भू-भाग के कारण सड़कों पर अतिरिक्त जोखिम बना रहता है। इस व्यवस्थित समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह व्यापक ढांचा अपनाया है।
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सड़क परियोजना के 5 प्रमुख चरणों में होगा ऑडिट
अब राज्य में किसी भी सड़क निर्माण परियोजना के दौरान निम्नलिखित 5 चरणों में अनिवार्य रूप से सुरक्षा जांच (Audit) की जाएगी:
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व्यवहार्यता / प्रारंभिक डिजाइन चरण: मार्ग चयन, अलाइनमेंट, चौराहों और मौजूदा नेटवर्क से जुड़ाव की जांच।
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विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) चरण: ज्यामितीय डिजाइन, रोड मार्किंग, साइनबोर्ड, लाइटिंग और पैदल यात्रियों/साइकिल चालकों की सुरक्षा की समीक्षा।
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निर्माण चरण: कार्यस्थल सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और श्रमिकों की सुरक्षा की जांच।
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यातायात खोलने से पूर्व चरण: दिन और रात दोनों समय सड़क का विस्तृत भौतिक निरीक्षण।
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मौजूदा सड़कों का ऑडिट: पुरानी सड़कों पर उभरते जोखिमों और सुरक्षा संबंधी कमियों को पहचानकर समय पर सुधार करना।
नीति के मुख्य आकर्षण और कड़े नियम
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1% बजट सुरक्षा के लिए आरक्षित: ₹1 करोड़ से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए कुल लागत का 1 प्रतिशत बजट अनिवार्य रूप से निर्धारित किया जाएगा।
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सख्त योग्यता मानक: ऑडिट केवल वही अधिकारी या IRC-प्रमाणित ऑडिटर करेंगे, जिन्होंने 15 दिवसीय रोड सेफ्टी प्रशिक्षण पूरा किया हो और उनके पास कम से कम 10 वर्षों का पहाड़ी सड़कों के निर्माण का अनुभव हो।
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स्वतंत्र जांच (Independent Audit): ऑडिटर का संबंधित सड़क परियोजना के निर्माण या क्रियान्वयन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होना चाहिए।
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PWD में ‘रोड सेफ्टी सेल’: मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित सेल गठित होगा, जो ऑडिटरों का पैनल बनाएगा और अनुपालन की निगरानी करेगा। ई-इन-सी (Engineer-in-Chief) हर तिमाही में इसकी समीक्षा करेंगे।
मानव जीवन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री
नीति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा:-
“राज्य सरकार हिमाचल के सड़क नेटवर्क को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास के हर चरण में मानव जीवन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से हम एक सक्रिय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। सुरक्षित सड़कें न केवल जीवन बचाती हैं, बल्कि आर्थिक विकास और पर्यटन को भी गति देती हैं।”
— ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
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आंकड़ों में सुधार: दुर्घटनाओं में आई कमी
राज्य सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
| विवरण | वर्ष 2023 | वर्ष 2024 | अंतर / कमी |
| कुल सड़क दुर्घटनाएं | 2,253 | 2,107 | – 6.48% |
| सड़क हादसों में मौतें | 892 | 806 | – 86 मौतें कम |
| घायलों की संख्या | 3,449 | 3,290 | – 159 घायल कम |
संपादकीय टिप्पणी: पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए नीतिगत और संस्थागत बदलाव की सख्त जरूरत थी। हिमाचल सरकार द्वारा अनिवार्य 1% बजट प्रावधान और 5-स्तरीय ऑडिट प्रक्रिया का लागू होना निश्चित रूप से प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।



