SJVN ने नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन (NJHPS) में ‘बाँध सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम’ का किया आयोजन
झाकड़ी में आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक सहभागिता और आधुनिक तकनीकों पर दिया गया जोर

19/05/2026-VIDYA SAGAR
शिमला: आपदा लचीलेपन और सक्रिय जोखिम प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, SJVN के प्रमुख नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन (NJHPS) ने राष्ट्रीय बाँध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के सहयोग से आज झाकड़ी में एक व्यापक बाँध सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाँध सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति स्थानीय लोगों को जागरूक करना, आपातकालीन तैयारियों को बढ़ावा देना और निचले (डाउनस्ट्रीम) क्षेत्रों के लिए प्रभावी जोखिम-निवारण रणनीतियाँ स्थापित करना था।
Press Release hindi 19.05.2026
समुदायों और हितधारकों का सशक्तिकरण
इस अवसर पर एसजेवीएन (SJVN) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) श्री भूपेंद्र गुप्ता ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आसपास के समुदायों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए, एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक) श्री अजय कुमार शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह पहल बाँध सुरक्षा की संस्कृति को मजबूत करने में समन्वित हितधारकों की भागीदारी, सार्वजनिक जागरूकता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।
इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किन्नौर के उपायुक्त (DC) डॉ. अमित शर्मा और NDSA के सदस्य (प्रशासन एवं वित्त) श्री सौरभ अग्रवाल द्वारा किया गया। गणमान्य अतिथियों और स्थानीय निवासियों का स्वागत करते हुए, परियोजना प्रमुख (NJHPS) श्री राजीव कपूर ने दोहराया कि स्थानीय समुदायों को सूचित और तैयार रखने के लिए इस क्षेत्र में नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा।

विशेषज्ञ अंतर्दृष्टि और तकनीक-संचालित सुरक्षा
इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों और अधिकारियों का एक पैनल एक साथ आया, जिसमें शामिल थे:
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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
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राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF)
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
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राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)
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राज्य प्रशासन के अधिकारी
प्रमुख वक्ताओं ने आधुनिक मौसम पूर्वानुमान, वास्तविक समय (रियल-टाइम) में आपदा प्रबंधन, और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) के लिए अत्याधुनिक उपग्रह तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से इस बात पर जोर दिया कि अचानक आने वाली बाढ़ और अनपेक्षित पारिस्थितिक चुनौतियों से निपटने के लिए त्वरित सामुदायिक समन्वय और आधुनिक तकनीक का मेल सबसे अचूक उपाय है।
सीधा संवाद और जमीनी कार्रवाई
इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण संवाद सत्र (इंटरैक्शन सेशन) रहा, जहाँ स्थानीय निवासियों—विशेषकर निचले गाँवों (डाउनस्ट्रीम) के लोगों ने—विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद किया। स्थानीय लोगों ने अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं, नदी बेसिन के पास रहने के अपने अनुभव साझा किए और प्रारंभिक चेतावनी वाले सायरन तथा निकासी मार्गों (इवेक्यूएशन रूट्स) को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
चर्चाओं से आगे बढ़कर, कार्यक्रम के उत्तरार्ध (सेकंड हाफ) को एक जीवंत जमीनी अभियान में बदल दिया गया, जिसमें शामिल थे:
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जागरूकता मार्च: सुरक्षा सतर्कता की वकालत करते हुए स्थानीय छात्रों द्वारा एक मार्च निकाला गया।
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वृक्षारोपण अभियान: नदी के किनारों पर पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पेड़ लगाए गए।
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शैक्षणिक नाटक (स्किट): आम जनता के लिए बाढ़ सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपदा जागरूकता को सरल बनाने के लिए नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया।
तकनीकी विशेषज्ञता को सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़कर, इस कार्यक्रम ने अधिकारियों और नागरिकों के बीच की दूरी को सफलतापूर्वक पाटने का काम किया, जिससे क्षेत्र में जल-विद्युत संचालन के लिए एक मजबूत और सुरक्षित खाका तैयार हुआ है।



