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युवाओं और बच्चों को तंबाकू से बचाने के लिए ‘कोटपा-2003’ को और सशक्त बनाएगी सरकार: स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी

'नो टोबैको डे कैंपेन-2026' के तहत शिमला में राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न; कानून में संशोधन और हुक्का बार पर कड़े नियंत्रण की घोषणा।

VIDYA SAGAR

शिमला | 31 मई 2026 बच्चों और युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ‘सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम’ (COTPA)-2003 को और अधिक मजबूत करने जा रही है। इसके लिए कानून में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे और राज्य में हुक्का बार को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लाए जाएंगे।

यह घोषणा प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव श्रीमती एम. सुधा देवी (IAS) ने ‘नो टोबैको डे कैंपेन-2026’ के अंतर्गत आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रसार कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन “तंबाकू मुक्त हिमाचल प्रदेश की ओर: नीति, प्रवर्तन एवं तंबाकू मुक्त पीढ़ी” विषय पर किया गया था।



सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले और चिंताजनक तथ्य आए सामने

कार्यशाला के दौरान राज्य में तंबाकू विक्रेताओं की सघनता और नियमों के अनुपालन पर आधारित एक विशेष सर्वे रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें कई गंभीर खुलासे हुए हैं:

  • 100 गज के दायरे में दुकानें: रिपोर्ट के मुताबिक, 10% से अधिक तंबाकू विक्रेता शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेजों) के 100 गज के दायरे में व्यवसाय कर रहे हैं, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।

  • चेतावनी बोर्ड का अभाव: अधिकांश विक्रेताओं ने अपनी दुकानों पर ‘नाबालिगों को तंबाकू बिक्री निषेध’ संबंधी अनिवार्य वैधानिक चेतावनी बोर्ड प्रदर्शित नहीं किए थे।

  • खुले आम प्रदर्शन: कई स्थानों पर तंबाकू उत्पादों को खुले रूप में प्रदर्शित पाया गया, जिससे बच्चों और किशोरों की इन तक पहुंच बेहद आसान हो गई है।


तंबाकू नियंत्रण किसी एक विभाग नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अब कड़े कदम उठाने का समय आ गया है। कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने तंबाकू नियंत्रण को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों पर बल दिया:

  1. संयुक्त प्रवर्तन अभियान: पुलिस, आबकारी और स्थानीय प्रशासन मिलकर औचक निरीक्षण करेंगे।

  2. विशेष निगरानी: शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के क्षेत्रों में 24/7 विशेष निगरानी रखी जाएगी।

  3. सामूहिक प्रयास: अधिकारियों ने रेखांकित किया कि तंबाकू नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी विभागों और नागरिक समाज की साझा भागीदारी आवश्यक है।



वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में 55 से अधिक विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • डॉ. गोपाल बेरी (निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं)

  • डॉ. सतीश चौधरी (निदेशक, दंत स्वास्थ्य सेवाएं)

  • डॉ. राणा जे. सिंह (निदेशक टोबैको कंट्रोल, वाइटल स्ट्रेटेजीज, नई दिल्ली)

  • श्री रविंदर कुमार (अतिरिक्त आयुक्त, आबकारी एवं कराधान)

  • डॉ. राजेश गुलेरी (उप मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन)

  • श्री विजय बरागटा (उप निदेशक, पंचायती राज)


निष्कर्ष: राज्य सरकार ने अंत में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों को धरातल पर पूरी कड़ाई के साथ लागू किया जाएगा।


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