भारत-नेपाल ऊर्जा साझेदारी: भारत के विद्युत सचिव ने एसजेवीएन (SJVN) की 900 मेगावाट की ‘अरुण-3’ जलविद्युत परियोजना की प्रगति की समीक्षा की
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल में भूमिगत पावरहाउस और बांध स्थल का किया दौरा; कठिन हिमालयी क्षेत्र में निर्माण की गति को सराहा

VIDYA SAGAR
शिमला / काठमांडू, 16 जुलाई 2026
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भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। भारत सरकार के विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने आज नेपाल में निर्माणाधीन एसजेवीएन (SJVN) की 900 मेगावाट क्षमता वाली ऐतिहासिक ‘अरुण-3’ जलविद्युत परियोजना (Arun-3 HEP) की प्रगति की विस्तृत और व्यापक समीक्षा की।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस सीमा-पार जलविद्युत परियोजना का निर्माण भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एसजेवीएन लिमिटेड द्वारा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘एसजेवीएन अरुण-3 पावर डेवलपमेंट कंपनी’ (SAPDC) के माध्यम से किया जा रहा है।

एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा
इस परियोजना के महत्व को दर्शाते हुए विद्युत सचिव के साथ भारत और नेपाल के कई शीर्ष राजनयिक और ऊर्जा प्रशासक इस दौरे पर मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
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श्री नवीन श्रीवास्तव, नेपाल में भारत के राजदूत
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श्री घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA)
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श्री दिवाकर नाथ मिश्रा, अतिरिक्त सचिव (जलविद्युत), विद्युत मंत्रालय
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श्री पंकज कुमार, संयुक्त सचिव (पारेषण), विद्युत मंत्रालय
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श्री राजेश कुमार चंदेल, निदेशक (परियोजनाएं), एसजेवीएन (SJVN)
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भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय, नेपाल में भारतीय दूतावास, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, एसजेवीएन और एसएपीडीसी (SAPDC) के वरिष्ठ अधिकारी।
पावरहाउस और बांध स्थल का जमीनी निरीक्षण
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षेत्रों का गहराई से निरीक्षण किया:
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पुखुआ स्थित भूमिगत पावरहाउस स्थल: टीम ने यहाँ चल रहे जटिल सिविल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। ऑन-साइट इंजीनियर्स ने प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न मील के पत्थरों को हासिल करने के लिए अपनाई जा रही निर्माण रणनीतियों से अवगत कराया।
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फाकसिंदा स्थित बांध स्थल (Dam Site): प्रतिनिधिमंडल ने यहाँ पहुँचकर मुख्य कंक्रीट बांध की संरचना, पानी के इनटेक (Intake) प्रबंधों और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचों के निर्माण कार्य की समीक्षा की।
कठिन परिस्थितियों में बेहतरीन इंजीनियरिंग की सराहना
समीक्षा बैठक के दौरान भारत के विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने बेहद कठिन और दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में एसजेवीएन और एसएपीडीसी (SAPDC) के इंजीनियर्स की कड़ी मेहनत और जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा:-
“हिमालय के इस बेहद चुनौतीपूर्ण और संकरे इलाके में इतनी विशाल जलविद्युत परियोजना को धरातल पर उतारना इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण है। अब तक की प्रगति बेहद सराहनीय है। निर्माण की वर्तमान गति को इसी तरह बनाए रखा जाए, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है कि सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानकों से कोई समझौता न हो।”
— श्री पंकज अग्रवाल, सचिव (विद्युत), भारत सरकार
एसजेवीएन के निदेशक (परियोजनाएं) श्री राजेश कुमार चंदेल ने भी पूरी टीम से इस ऊर्जा और फोकस को बरकरार रखने का आग्रह किया ताकि तय समय सीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कमीशन (शुरू) किया जा सके।
-Press Release-Hindi 16.07.2026-
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पर्यावरण और स्थानीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता
प्रतिनिधिमंडल को जानकारी देते हुए एसएपीडीसी (SAPDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पंकज चौधरी ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ स्थानीय समाज के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी कार्यों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि परियोजना के साथ-साथ निम्नलिखित कार्य भी पूरी संवेदनशीलता से किए जा रहे हैं:
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प्रभावित स्थानीय लोगों के लिए व्यापक पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था (Rehabilitation & Resettlement) योजनाएं।
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स्थानीय क्षेत्रों के उत्थान के लिए सामुदायिक विकास कार्यक्रम।
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पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक पर्यावरणीय प्रबंधन उपाय।
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रणनीतिक महत्व
900 मेगावाट की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना न केवल एसजेवीएन का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय उपक्रम है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच गहरे होते आर्थिक और बुनियादी ढांचागत संबंधों का एक जीवंत प्रतीक भी है। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल भारी मात्रा में स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को भी एक नई दिशा मिलेगी।



