हिमाचल न्यूज

हिमाचल में लघु एवं सीमांत किसानों के लिए भूमि नीति तैयार, कैबिनेट बैठक में मंजूरी के बाद केंद्र को भेजेगी सरकार

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में बड़ा फैसला; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नियमित होंगे भूमि कब्जे।

VIDYA SAGAR

विशेष ब्यूरो, शिमला 04 जून, 2026

शिमला: हिमाचल प्रदेश के लाखों लघु और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य में छोटे किसानों के भूमि कब्जों को नियमित (Regularize) करने के लिए बहुप्रतीक्षित भूमि नीति (Land Policy) का मसौदा पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस नीति को अंतिम रूप देने के लिए आज राजधानी शिमला में एक महत्वपूर्ण मंत्रिमंडलीय उप-समिति (Cabinet Sub-Committee) की बैठक आयोजित की गई।

यह उच्च स्तरीय बैठक राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।



सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बनी नीति

बैठक के दौरान उप-समिति को अवगत कराया गया कि यह नीति माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उन गरीब, लघु और सीमांत किसानों को राहत देना है, जो लंबे समय से कानूनी अड़चनों के कारण अपनी भूमि के मालिकाना हक से वंचित हैं।


 अब कैबिनेट की मुहर का इंतजार

मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि तैयार की गई इस नई नीति को अब आगामी मंत्रिमंडल (Cabinet) की बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद, इस नीति को अंतिम स्वीकृति और आगामी औपचारिकताओं के लिए भारत सरकार (केंद्र सरकार) को भेजा जाएगा।


बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

नीति को प्रशासनिक और कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए आयोजित इस बैठक में सरकार के कई वरिष्ठ नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। बैठक में मुख्य रूप से शामिल हुए:

  • राजीव बाली, प्रधान सचिव (विधि)

  • अनिल चौहान, अतिरिक्त सचिव (राजस्व)

  • वन विभाग के उच्चाधिकारी



किसानों को क्या होगा फायदा? (संपादकीय विश्लेषण)

“हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहाँ के अधिकांश परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। इस नीति के लागू होने से न केवल छोटे किसानों को उनकी भूमि का वैध अधिकार मिलेगा, बल्कि वे कृषि लोन, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ भी आसानी से उठा सकेंगे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।”

कैबिनेट की अगली बैठक में इस नीति पर लगने वाली मुहर पर अब पूरे प्रदेश के किसानों की नजरें टिकी हुई हैं।


Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button