आपदा प्रबंधन में हिमाचल की बड़ी छलांग: अब ‘राहत’ नहीं, ‘प्रतिरोध’ पर होगा फोकस; शुरू हुई ₹2,688 करोड़ की HP-READY परियोजना
मुख्यमंत्री सुक्खू का बड़ा बयान— "जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच सिर्फ मदद बांटना काफी नहीं, हिमाचल को आपदा-रोधी बनाना हमारा लक्ष्य।"

01/06/2026-VIDYA SAGAR
शिमला। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दौर में बार-बार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश ने अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण में एक युगांतरकारी बदलाव किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि राज्य सरकार अब पारंपरिक ‘राहत केंद्रित शासन’ (आपदा के बाद सहायता) की नीति को छोड़कर ‘प्रतिरोध केंद्रित प्रशासन’ (आपदा से पहले मजबूती) की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार ने ₹2,688 करोड़ की महत्वाकांक्षी ‘‘हिमाचल प्रदेश रेजिलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी’’ (HP-READY) परियोजना का शंखनाद कर दिया है।
⏳ 2030 तक सुरक्षित होगा हिमाचल: क्या है HP-READY?
यह परियोजना पूरी तरह से एक टाइम-बाउंड मिशन है, जिसे जनवरी 2026 से नवंबर 2030 तक लागू किया जाएगा। इसका मुख्य ध्यान तीन स्तंभों पर केंद्रित है:
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आपदा की पूर्व तैयारी (Preparedness)
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जोखिम न्यूनीकरण (Mitigation)
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पुनर्वास तंत्र का सुदृढ़ीकरण (Rehabilitation)
📊 आंकड़े गवाह हैं: क्यों पड़ी इस बड़े कदम की जरूरत?
पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश पारिस्थितिक (Ecological) रूप से बेहद संवेदनशील है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े राज्य में मची तबाही की गवाही देते हैं:
| आपदा का प्रकार | पिछले 3 वर्षों में दर्ज घटनाएं |
| बादल फटना (Cloudburst) | 66 से अधिक |
| भूस्खलन (Landslides) | 234 |
| फ्लैश फ्लड (Flash Floods) | 121 |
इन आपदाओं के कारण न केवल सैकड़ों मासूमों की जान गई, बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी और निजी संपत्तियां भी जमींदोज हो गईं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया।

🏗️ बुनियादी ढांचे का कायाकल्प और हाई-टेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम
HP-READY परियोजना के तहत राज्य सरकार सिर्फ कागजी काम नहीं, बल्कि जमीन पर मजबूत बदलाव करने जा रही है:
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आपदा-रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर: बाढ़ या भूस्खलन से प्रभावित होने वाले परिवहन नेटवर्क (सड़कों और पुलों), पेयजल योजनाओं, स्वच्छता प्रणालियों और बिजली ग्रिडों को आधुनिक तकनीक से दोबारा ‘डिजास्टर-प्रूफ’ बनाया जाएगा।
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तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का मेल: मौसम और खतरों की सटीक जानकारी के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही वैज्ञानिक भू-उपयोग योजना (Scientific Land-use Planning) लागू की जाएगी।
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आर्थिक सुरक्षा कवच: आपदा प्रभावितों के लिए ‘आपदा जोखिम वित्तपोषण’ और इंश्योरेंस का एक मजबूत आर्थिक ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि आजीविका और रोजगार के अवसर सुरक्षित रहें।
👥 जन-आंदोलन बनेगी आपदा तैयारी: बच्चों और महिलाओं को मिलेगी ट्रेनिंग
प्रशासन का मानना है कि कोई भी बड़ी लड़ाई बिना जनता के सहयोग के नहीं जीती जा सकती। इसीलिए इस परियोजना के तहत जमीनी स्तर पर एक नई संस्कृति की शुरुआत की जा रही है:
🔍 कड़ी निगरानी के लिए बनेगी स्पेशल यूनिट
परियोजना में पारदर्शिता और गति बनाए रखने के लिए एक समर्पित ‘परियोजना प्रबंधन इकाई’ (Project Management Unit) का गठन किया जाएगा, जो समय-समय पर इसके कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन और नियमित निगरानी करेगी।
💬 “सतत् विकास के लिए सुरक्षा जरूरी” — मुख्यमंत्री सुक्खू
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस नीतिगत बदलाव पर जोर देते हुए कहा:-
सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्कूली बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण (Training) कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे स्थानीय लोग खुद संकट के समय ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (सबसे पहले मदद करने वाले) की भूमिका निभा सकेंगे, जिससे जान-माल के नुकसान को बेहद कम किया जा सकेगा।
“पिछले तीन वर्षों की आपदाओं ने हमें सिखाया है कि हमें अपनी सोच बदलनी होगी। HP-READY सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि हिमाचल की सुरक्षा की विस्तृत कार्य योजना है। इसके तहत उन जिलों और समुदायों को प्राथमिकता दी जाएगी जो सबसे अधिक संवेदनशील हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जलवायु परिवर्तन की कोई भी चुनौती हिमाचल की विकास यात्रा को न रोक सके।”



