आपदा-रोधी हिमाचल की ओर कदम: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘हिप्पा’ में उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह की अध्यक्षता की
पश्चिमी हिमालय में रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग पर मंथन; जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सुरक्षित भविष्य के लिए नई नीतियों पर ज़ोर।

VIDYA SAGAR
शिमला, 10 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के फेयरलॉन्स स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र (Valedictory Session) की अध्यक्षता की। यह कार्यशाला “टुवर्ड्स रेजिलिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन द वेस्टर्न हिमालया” (Western Himalaya में आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा योजना की ओर) विषय पर केंद्रित थी, जिसमें देश-विदेश के प्रबुद्ध भू-वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र पर्यावरण और भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ा है, जिससे निपटने के लिए विकास की नीतियों में क्रांतिकारी और साहसिक बदलाव समय की मांग हैं।
सुरक्षित और मजबूत बुनियादी ढांचे पर ज़ोर: मुख्य बिंदु
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के दौरान मिले नीतिगत सुझावों की सराहना करते हुए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा:
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भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब सरकार का लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त सड़कों या पुलों का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐसी ‘आपदा-रोधी’ (Disaster Resilient) अवसंरचना तैयार करना है जो भविष्य की किसी भी भीषण आपदा को झेलने में सक्षम हो।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले मृदा परीक्षण, भूगर्भीय सर्वे और आधुनिकतम इंजीनियरिंग मानकों को कड़ाई से लागू किया जाना अनिवार्य है।
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साझा रणनीतियों का निर्माण: मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला में मंथन के बाद निकले निष्कर्ष और विशेषज्ञों की सिफारिशें न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे पश्चिमी हिमालयी राज्यों के लिए एक मार्गदर्शिका (Blueprint) का कार्य करेंगी।
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विशेषज्ञों और आयोजकों को दी बधाई
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिप्पा (HIPA) और इस कार्यशाला के सह-आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे बौद्धिक समागम अकादमिक विमर्श तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इनका सीधा लाभ धरातल पर आम जनता की सुरक्षा के रूप में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस कार्यशाला से प्राप्त रिपोर्ट और व्यावहारिक सुझावों को अपनी आगामी विकास योजनाओं में प्राथमिकता के साथ शामिल करेगी।
“हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं और यहाँ सतत विकास (Sustainable Development) के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हम एक ऐसे सुरक्षित, सुदृढ़ और समावेशी हिमाचल का निर्माण कर रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो।”
— ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
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प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधारों का खाका
इस समापन सत्र के दौरान राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नीति आयोग के पूर्व सदस्यों और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक प्रमुखों ने भी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। कार्यशाला में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को मजबूत करने और संवेदनशील हिमनदीय झीलों (Glacial Lakes) की निरंतर डिजिटल निगरानी करने जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी सुधारों पर भी आम सहमति बनी।



