आपदा से सुरक्षा की ओर कदम: हिमाचल प्रदेश में ₹3,500 करोड़ की लागत से बनेगी आपदा-रोधी आधारभूत संरचना
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिप्पा कार्यशाला में की बड़ी घोषणा; आपदा रिपोर्ट का विमोचन और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए 'SIAU पोर्टल' लॉन्च।

VIDYA SAGAR
शिमला, 10 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश को भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महायोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से ‘आपदा-रोधी’ (Disaster Resilient) आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी।
मुख्यमंत्री आज शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPPA) में आयोजित ‘टुवर्ड्स रेजिलिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन हिमालय’ विषय पर एक उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

2023 और 2025 की आपदाओं से मिले अनुभवों का लाभ
मुख्यमंत्री ने पिछले वर्षों में राज्य द्वारा झेली गई भीषण प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए सरकार के प्रयासों और भविष्य की रणनीतियों को रेखांकित किया:
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ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन: वर्ष 2023 की भीषण आपदा के समय राज्य के विभिन्न हिस्सों में फंसे लगभग 75,000 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया था। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी की सराहना की, जिन्होंने स्वयं चंद्रताल झील में शून्य से नीचे के तापमान के बीच जाकर 300 पर्यटकों को बचाया था।
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राहत नीति में बड़ा बदलाव: मुख्यमंत्री ने बताया कि 2023 की आपदा में नष्ट हुए 23,000 मकानों के प्रभावितों की मदद के लिए सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर इतिहास रचा।
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नुकसान में आई कमी: बेहतर तैयारियों के कारण सरकार ने वर्ष 2025 की आपदा का अधिक कुशलता से सामना किया, जिससे गंभीर स्थिति के बावजूद नुकसान काफी कम हुआ।

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जलवायु परिवर्तन और साहसिक निर्णयों की आवश्यकता
मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य में बढ़ती बादल फटने (Cloud Burst) की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह समस्या जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों के जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण का परिणाम हो सकती है। उन्होंने आगाह किया कि आज यह समस्या हिमाचल में है, लेकिन कल दूसरे राज्यों को भी प्रभावित करेगी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार विकास की नीतियों में साहसिक और बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह तैयार है।
महत्वपूर्ण रिपोर्ट का विमोचन और SIAU पोर्टल की शुरुआत
इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा दो बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:
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आपदा रिपोर्ट का विमोचन: मुख्यमंत्री ने ‘टुवर्ड्स रेजिलिएंट हिमाचल प्रदेश: लेसंस एंड रिकमडेशंस फ्रॉम 2023 एंड 2025 हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल डिजास्टर’ शीर्षक से तैयार विस्तृत रिपोर्ट जारी की।
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SIAU पोर्टल की लॉन्चिंग: प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए ‘हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (SIAU पोर्टल)’ लॉन्च किया गया। यह पोर्टल विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और डेटा आधारित सटीक निर्णय लेने में मददगार साबित होगा।
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प्रबुद्ध जनों ने रखे विचार
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दीपक राठौर (उपाध्यक्ष, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण): उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग इंजीनियरिंग मानकों को अपनाने, संवेदनशील हिमनदीय झीलों (Glacial Lakes) की निगरानी और मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) स्थापित करने पर बल दिया।
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के.के. पंत (मुख्य सचिव): उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त ढांचे का पुनर्निर्माण करना नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
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डॉ. वी.के. पॉल (पूर्व सदस्य, नीति आयोग): उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग को एक गंभीर चेतावनी बताते हुए सभी विभागों को मिलकर एक व्यापक आपदा-रोधी नीति अपनाने की सलाह दी।
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गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति:
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर हेड देबोजीत पालित, हिप्पा की निदेशक रूपाली ठाकुर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और भू-वैज्ञानिक उपस्थित रहे।



