किन्नौर चुनावी दंगल: रारंग और रिब्बा में बढ़ी राजनीतिक तपिश, दिग्गजों ने ठोंकी ताल
पंचायत समिति: प्रतिभा दुग्गल की दावेदारी ने बढ़ाई हलचल

12/05/2026-VIDYA SAGAR
रिकांगपिओ: हिमाचल प्रदेश में जारी पंचायतीराज चुनावों के बीच किन्नौर जिले की दो महत्वपूर्ण पंचायतों—रारंग और रिब्बा—में चुनावी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। सतलुज नदी के दोनों छोर पर बसे इन गांवों में राजनीतिक समीकरण हर पल बदल रहे हैं। जहाँ रिब्बा में निर्विरोध चयन के बाद भी भीतरघात और दलीय समर्थन की चर्चा है, वहीं रारंग में प्रधान पद के लिए सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
पंचायत समिति: प्रतिभा दुग्गल की दावेदारी ने बढ़ाई हलचल
रिब्बा वार्ड से पूर्व बीडीसी मेंबर और कांग्रेस समर्थित प्रतिभा दुग्गल ने एक बार फिर चुनावी बिगुल बजा दिया है। पिछली बार की जीत और क्षेत्र में अपनी पकड़ के दम पर प्रतिभा इस बार न केवल सदस्य, बल्कि पंचायत समिति अध्यक्ष की कुर्सी की भी प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं, क्योंकि यह पद इस बार महिला के लिए आरक्षित है। उनके नामांकन के दौरान निर्विरोध प्रधान राधिका चारस की उपस्थिति ने समर्थकों में नया जोश भर दिया है।
रारंग पंचायत: प्रधान पद के लिए ‘शक्ति प्रदर्शन’
रारंग पंचायत में प्रधान का पद महिला आरक्षित होने के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहाँ मुख्य टक्कर कांग्रेस समर्थित प्रताप भगति और भाजपा समर्थित राज लक्ष्मी के बीच है। राज लक्ष्मी पहले भी प्रधान रह चुकी हैं, जिससे उनके पास अनुभव की ताकत है, जबकि प्रताप भगति बदलाव के नारे के साथ मैदान में हैं।
उप-प्रधान पद के लिए चतुष्कोणीय मुकाबला: रारंग में उप-प्रधान की कुर्सी के लिए चार प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं:
-
चंद्र भगत नेगी (पूर्व उप-प्रधान)
-
करजंग निमा
-
गुमान आखरास (युवा चेहरा)
-
यौवन नेगी
विकास की कसौटी: रिब्बा पंचायत की उपलब्धियाँ
चुनावी प्रचार के बीच प्रतिभा दुग्गल ने अपने पिछले कार्यकाल का ‘रिपोर्ट कार्ड’ जनता के सामने रखा है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में पंचायत ने कई मील के पत्थर स्थापित किए, जिनमें शामिल हैं:
-
सुविधाएँ: पंचायत घर में लाइब्रेरी, जिम, लोकमित्र केंद्र, म्यूजिक स्टूडियो और बुजुर्ग कक्ष का निर्माण।
-
बुनियादी ढांचा: सामुदायिक शौचालय, स्कूल मरम्मत, सड़क सुरक्षा दीवारें और बावड़ियों का जीर्णोद्धार।
-
सामाजिक कार्य: फ्लैश फ्लड के दौरान त्वरित आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य शिविर और मनरेगा के माध्यम से रोजगार सुनिश्चित करना।
भविष्य का विजन: आगामी कार्यकाल के लिए उन्होंने सीवरेज सिस्टम, ठोस कचरा प्रबंधन, ईको-टूरिज्म, पार्किंग सुविधा और पंचायतों की स्थायी आय बढ़ाने जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया है।
निष्कर्ष: किन्नौर की इन पंचायतों का चुनाव केवल स्थानीय प्रतिनिधियों का चयन नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के जमीनी आधार की परीक्षा भी है।




