ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ़्तार: वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग (KVIC) ने बनाए नए कीर्तिमान
'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत खादी क्षेत्र में रोज़गार और उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल; डिजिटल गवर्नेंस और 'स्वीट रिवॉल्यूशन' से चमके ग्रामीण शिल्पकार।

26/05/2026-VIDYA SAGAR
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत कार्यरत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने वार्षिक अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न से प्रेरित होकर KVIC ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और सुदूर क्षेत्रों में स्वरोज़गार के नए अवसर पैदा करने में इस वर्ष एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
PR-H-26 May-KVIC Annual Data_2026-Final
आंकड़े जारी करते हुए KVIC के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने बताया कि आयोग की योजनाओं ने न केवल खादी कारीगरों की आय में वृद्धि की है, बल्कि आधुनिक तकनीकी और डिजिटल माध्यमों को अपनाकर पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की है।
वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 की मुख्य विशेषताएं और उपलब्धियां:
-
कारीगरों के पारिश्रमिक में बंपर वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2025-26 (01 अप्रैल 2025 से प्रभावी) के दौरान खादी कताई (Spinning) की मजदूरी को बढ़ाकर 15.00 रुपये प्रति लच्छी (Hank) कर दिया गया है। इसके साथ ही बुनाई मजदूरी (Weaving wages) में भी 20% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस कदम से देश के लगभग 4.32 लाख से अधिक बुनकरों और कतिनों को सीधा लाभ मिला है।
-
‘स्वीट रिवॉल्यूशन’ (मीठी क्रांति) की बड़ी कामयाबी: राष्ट्रीय हनी मिशन (Honey Mission) के तहत KVIC ने 2017-18 से 2025-26 के बीच देश भर में 2,46,099 बी-बॉक्स (मधुमक्खी के बक्से) और कॉलोनियां वितरित की हैं। इसके परिणामस्वरूप देश में शहद उत्पादन में 24,269 मीट्रिक टन की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
-
रिकॉर्ड तोड़ शहद उत्पादन और निर्यात: अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान शहद का अनुमानित उत्पादन 5,512 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जबकि KVIC से जुड़े मधुमक्खी पालकों द्वारा किया गया शहद निर्यात लगभग 31 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू गया।
MSME इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए NSIC के साथ ऐतिहासिक साझेदारी
बाजार में खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए KVIC ने राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (NSIC) के साथ मिलकर एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। इस साझेदारी के माध्यम से दोनों संस्थान एक-दूसरे के डिजिटल और भौतिक प्लेटफॉर्मों का उपयोग करके MSME लाभार्थियों और ग्रामीण उद्यमियों को वैश्विक बाजार उपलब्ध करा रहे हैं।
न्यूनतम व्यय, अधिकतम सुशासन (Minimal Expenditure, Effective Governance)
हाल ही में विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर देशव्यापी कार्यक्रमों को वर्चुअली संबोधित करते हुए अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा:-
“प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विज़न के अनुरूप, अब KVIC अपने अधिकांश कार्यक्रमों और प्रशासनिक कार्यों को वर्चुअल मोड में संचालित कर रहा है। इससे न केवल ईंधन और यात्रा के अनावश्यक खर्चों में भारी कटौती हुई है, बल्कि देश के सुदूर गांवों में बैठे शिल्पकारों की भागीदारी भी सुनिश्चित हुई है।”
आंकड़ों पर एक नज़र (FY 2025-26):
| प्रमुख क्षेत्र | वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े | प्रभाव/लाभार्थी |
| बुनाई मजदूरी में वृद्धि | 20% की बढ़ोतरी (01 अप्रैल 2025 से) | ग्रामीण बुनकरों के जीवन स्तर में सुधार |
| लाभान्वित कारीगर | 4.32 लाख से अधिक कतिन और बुनकर | सीधे बैंक खातों में वित्तीय लाभ |
| सालाना शहद उत्पादन | 5,512 मीट्रिक टन (अनुमानित) | मीठी क्रांति के तहत ग्रामीण आत्मनिर्भरता |
| शहद का कुल निर्यात | लगभग ₹31 करोड़ | वैश्विक स्तर पर भारतीय खादी ब्रांड की पहचान |
KVIC द्वारा जारी ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि खादी अब केवल स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत के आर्थिक बदलाव की रीढ़ बन चुकी है।



