प्राकृतिक खेती में देश का ‘रोल मॉडल’ बनेगा हिमाचल, उत्पादों की बिक्री के लिए बनेगा अलग मार्केटिंग विंग: सीएम सुक्खू
राज्य में 2.56 लाख से अधिक किसान कर रहे हैं प्राकृतिक खेती; दूध उत्पादकों को बांटे ₹300 करोड़

VIDYA SAGAR
शिमला, 04 जुलाई 2026।
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हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के क्षेत्र में देश का शीर्ष राज्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज कृषि विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी कार्यकुशलता और समर्पण के साथ काम किया जाए।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए कृषि विभाग के भीतर प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए एक अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही इन उत्पादों की पहुंच देश-विदेश तक बढ़ाने के लिए डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर बिक्री की संभावनाएं तलाशने को भी कहा गया है।
2.56 लाख से अधिक किसानों ने अपनाई प्राकृतिक विधि
मुख्यमंत्री ने बैठक में जानकारी दी कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के 2,56,870 किसान लगभग 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के चलते खेती छोड़ चुके लोग भी अब दोबारा खेतों की ओर लौट रहे हैं और इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।
ऐतिहासिक कदम: प्राकृतिक फसलों और दूध पर देश में सबसे ज्यादा MSP
हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने प्राकृतिक खेती से उपजी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी दी है। सरकार ने इन दरों में ऐतिहासिक वृद्धि की है:
प्राकृतिक फसलों की नई MSP दरें:
| फसल | नई समर्थन मूल्य दर (प्रति किलोग्राम) |
| गेहूं | ₹80 |
| मक्की | ₹50 |
| कच्ची हल्दी | ₹150 |
| पांगी घाटी की जौ | ₹80 |
| अदरक | ₹30 |
डेयरी सेक्टर में क्रांति: ₹300 करोड़ का भुगतान
दूध उत्पादन को ग्रामीण आर्थिकी की रीढ़ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध पर MSP लागू होने के बाद सहकारी डेयरी प्रणाली से रिकॉर्ड संख्या में किसान जुड़े हैं। सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश के दूध उत्पादकों को ₹300 करोड़ का सीधे तौर पर भुगतान किया है।
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गाय का दूध: ₹32 से बढ़ाकर सीधे ₹61 प्रति लीटर किया गया।
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भैंस का दूध: ₹47 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर किया गया।
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बड़ा भंगाल बनेगी ‘प्राकृतिक खेती पंचायत’, राजमाह को मिलेगा GI टैग
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के सुदूरवर्ती बड़ा भंगाल क्षेत्र को विशेष ‘प्राकृतिक खेती पंचायत’ घोषित करने की औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, बड़ा भंगाल क्षेत्र की प्रसिद्ध राजमाह की फसल को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री का संकल्प:
“हमारी सरकार प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हिमाचल प्रदेश को हरित राज्य और प्राकृतिक खेती का सिरमौर बनाने के लिए धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।”
— ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
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बैठक में रहे उपस्थित: इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, कृषि सचिव सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक राम कुमार गौतम सहित कृषि विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।



