ऐतिहासिक कदम: प्रधानमंत्री मोदी ने किया देश की सबसे बड़ी एकल स्थान ‘DCR’ सोलर परियोजना का उद्घाटन
SJVN के 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट से देश को मिलेगी नई ऊर्जा; ₹5,492 करोड़ की लागत से बदला राजस्थान का परिदृश्य

VIDYA SAGA- 04/07/2026
शिमला/बीकानेर।
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भारत के नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के पचपदरा से SJVN के 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट का भव्य उद्घाटन किया। यह परियोजना देश के स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास (Sustainability) के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
इस ऐतिहासिक समारोह के अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित दोनों उपमुख्यमंत्री— दीया कुमारी व डॉ. प्रेम चंद बैरवा उपस्थित रहे।
वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में ‘नवरत्न’ सीपीएसई सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) के सीएमडी भूपेंद्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा, निदेशक (वित्त) पार्थाजीत दे, निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल और एसजीईएल (SGEL) के सीईओ प्रशांत शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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स्वदेशी ताकत: देश का सबसे बड़ा ‘DCR’ सोलर प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट का निर्माण SJVN की नवीकरणीय ऊर्जा शाखा, ‘SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड’ (SGEL) द्वारा राजस्थान के बीकानेर में किया गया है।
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लागत और क्षेत्र: लगभग ₹5,492 करोड़ के निवेश से इस प्रोजेक्ट को करीब 5,000 एकड़ के विशाल भूभाग पर विकसित किया गया है।
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आत्मनिर्भर भारत की मिसाल: डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) श्रेणी के तहत यह एक ही स्थान पर स्थित भारत का सबसे बड़ा एकल EPC सोलर प्रोजेक्ट है, जो पूरी तरह से स्वदेशी क्षमताओं पर आधारित है। इसमें लगभग 24.22 लाख घरेलू सोलर मॉड्यूल और करीब 175 करोड़ मेड-इन-इंडिया सोलर सेल्स का उपयोग किया गया है।
Press Release hindi- 04.07.2026
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इन राज्यों को रोशन करेगी बीकानेर की धूप
यह प्रोजेक्ट चालू होने के पहले साल में लगभग 2,454.84 मिलियन यूनिट और अपने 25 साल के परिचालन जीवनकाल में कुल 56,482.14 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन करेगा। इस बिजली की आपूर्ति देश के तीन प्रमुख राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को की जाएगी:
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राजस्थान: 500 मेगावाट
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जम्मू और कश्मीर: 300 मेगावाट
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उत्तराखंड: 200 मेगावाट
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पर्यावरण को बड़ा फायदा:
इस प्रोजेक्ट के चालू होने से इसके पूरे जीवनकाल में लगभग 2.79 बिलियन किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो भारत के वैश्विक जलवायु समझौतों और पर्यावरण संरक्षण के संकल्पों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
स्थानीय विकास और रोजगार के खुले नए द्वार
2,000 से अधिक लोगों को रोजगार
सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इस प्रोजेक्ट ने क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को भी बदल दिया है। इसके निर्माण और कमीशनिंग चरण के दौरान 2,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को संबल मिला है।
बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
परियोजना के आने से बीकानेर क्षेत्र में सड़कों, मजबूत ट्रांसमिशन सिस्टम और अन्य एसोसिएटेड सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है, जिसने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे को एक नई रफ्तार दी है।
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SJVN की बढ़ती साख
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत काम करने वाली नवरत्न कंपनी SJVN की स्थापित क्षमता अब इस प्रोजेक्ट के साथ और अधिक सुदृढ़ हो गई है। वर्तमान में SJVN की स्थापित क्षमता 4,196.5 मेगावाट तक पहुंच गई है। बीकानेर प्रोजेक्ट की यह सफलता देश को ऊर्जा-सुरक्षित और हरित भविष्य की ओर ले जाने की SJVN की प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित करती है।



