बिहार परिवहन विभाग पर रिश्वत के गंभीर आरोप: सच या सोशल मीडिया का सनसनीखेज दावा?
ट्रक चालक का आरोप— ₹1000 न देने पर काटा ₹7500 का चालान; जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

05/06/2026-VIDYA SAGAR
पटना:
बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के दावों के बीच क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही एक पोस्ट ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल दावे के अनुसार, चेकिंग के दौरान एक ट्रक चालक से कथित तौर पर अवैध रूप से ₹1000 की मांग की गई थी, और मांग पूरी न होने पर बदले की भावना से भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रही जानकारी के मुताबिक, यह घटना बिहार के एक प्रमुख राजमार्ग पर चेकिंग के दौरान हुई। पीड़ित ट्रक चालक का आरोप है कि उसके पास गाड़ी के सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद, ऑन-ड्यूटी कर्मियों द्वारा कथित रूप से ₹1000 की रिश्वत मांगी गई। जब चालक ने यह राशि देने से साफ इनकार कर दिया, तो कर्मियों ने कथित तौर पर उसके ऊपर ₹7500 का चालान काट दिया।
वायरल पोस्ट का मुख्य अंश:
“हमसे ₹1000 की मांग की गई थी। जब हमने ईमानदारी दिखाई और पैसे देने से मना किया, तो नियम-कानून का धौंस दिखाकर ₹7500 का ऑनलाइन चालान हमारे हाथ में थमा दिया गया।”
दावों की सत्यता और प्रशासनिक जांच का इंतजार
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग लगातार बिहार सरकार और परिवहन विभाग को टैग कर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। हालांकि, **’हिमाचल न्यूज डेली’ (himachalnewsdaily.com)** इस वायरल पोस्ट और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तकनीकी खामियों, ओवरलोडिंग या किसी अन्य गुप्त उल्लंघन के कारण भी वैध चालान काटे जाते हैं, जिसे बाद में चालकों द्वारा सोशल मीडिया पर गलत रूप में पेश किया जाता है। इस मामले की असल हकीकत संबंधित विभाग की उच्च स्तरीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
व्यवस्था और पारदर्शिता पर उठते सवाल
यदि प्राथमिक जांच में इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई पाई जाती है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता, जनता के प्रति जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर एक बड़ा धब्बा होगा। डिजिटल चालान प्रणाली को इसी उद्देश्य से लागू किया गया था ताकि ऑन-कैश लेन-देन और भ्रष्टाचार को मिटाया जा सके, लेकिन इस तरह के मामले जमीनी स्तर पर कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या परिवहन विभाग इस वायरल शिकायत का संज्ञान लेकर कोई आंतरिक जांच शुरू करता है या यह मामला महज सोशल मीडिया की एक और अनसुलझी बहस बनकर रह जाता है।



