राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय में युवाओं के विकास के लिए 100 दिवसीय रोडमैप का किया शुभारम्भ
‘विकसित भारत-2047’ के विजन के अनुरूप कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

12 अक्तूबर, 2026
(Viren Thakur)
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल एवं डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविन्द्र गुप्ता ने विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए ‘युवाओं के विकास के लिए 100 दिवसीय रोडमैप’ का शुभारम्भ किया। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप युवाओं के कौशल विकास, उद्यमिता, रोजगार सृजन और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
इस रोडमैप के माध्यम से शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल, नवाचार और उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि प्रदेश के युवा अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
अंतर-विश्वविद्यालय समन्वय से युवाओं को सशक्त बनाने की पहल
राज्यपाल के निर्देशों के अनुरूप तैयार किए गए अंतर-विश्वविद्यालय ‘विकसित भारत टास्क फोर्स’ रोडमैप का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय मजबूत करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है। इसके माध्यम से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रासंगिकता में सुधार के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देने का लक्ष्य रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल ने हाल ही में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को एक साझा मंच पर लाने के लिए कुलाधिपति की अंतर-विश्वविद्यालय ‘विकसित भारत टास्क फोर्स’ का गठन किया था। कुलपतियों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को युवा सशक्तिकरण, नवाचार, सफल पहलों के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने पर केंद्रित 100 दिवसीय रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए थे।
व्यावहारिक कौशल और उद्यमिता पर रहेगा विशेष जोर
रोडमैप का शुभारम्भ करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और उद्यमिता राष्ट्रीय प्रगति के प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल तथा उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ना आवश्यक है। इससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे और वे अपने ज्ञान को उत्पादक उद्यमों में बदल सकेंगे।
राज्यपाल ने बागवानी, वानिकी और इनसे जुड़े क्षेत्रों में प्रदेश की विशेष क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए उद्यमी बनने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की अपार संभावनाएं हैं।
नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की सोच विकसित करने पर बल
राज्यपाल ने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहने और स्वयं रोजगार सृजित करने की सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 100 दिवसीय रोडमैप शैक्षणिक शिक्षा और वास्तविक बाजार की मांगों के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक प्रभावी कार्ययोजना है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराने, नवाचार को बढ़ावा देने और बागवानी एवं वानिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान करने से प्रदेश के युवा आर्थिक विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। इसके साथ ही वे विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
बागवानी, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन में मिलेगा प्रशिक्षण
100 दिवसीय रोडमैप के तहत युवाओं को विभिन्न कृषि एवं बागवानी आधारित गतिविधियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। इनमें बाग प्रबंधन, ग्राफ्टिंग, नर्सरी उत्पादन, संरक्षित खेती, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, टिश्यू कल्चर, मृदा परीक्षण, कृषि-वानिकी और कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को अनुभवात्मक शिक्षा, ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव, व्यवसाय योजना तैयार करने, बाजार से जुड़ाव और उद्योगों में इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनमें उद्यमशीलता की भावना विकसित करना है।
इस पहल में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, जनजातीय समुदायों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विकास के अवसर समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच सकें और ग्रामीण आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।
विश्वविद्यालय की टीम के प्रयासों की सराहना
राज्यपाल ने रोडमैप तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा और उनकी पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही, इससे ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी और सतत विकास को गति मिलेगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा ने राज्यपाल के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित समन्वय टीम कार्य करेगी। यह टीम निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजनाओं को लागू करने, नियमित निगरानी करने और परिणामोन्मुखी पहलों को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस पहल को हिमाचल प्रदेश के युवाओं और कृषक समुदायों के लिए ठोस एवं सकारात्मक परिणामों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
आत्मनिर्भर हिमाचल और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
100 दिवसीय रोडमैप को प्रदेश के युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बागवानी एवं वानिकी जैसे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और बाजार आधारित अवसर उपलब्ध कराने से युवाओं को स्वरोजगार के नए विकल्प मिल सकते हैं।
इस पहल की सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय और निर्धारित लक्ष्यों की नियमित निगरानी पर निर्भर करेगी। यदि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो यह रोडमैप युवाओं की क्षमता के बेहतर उपयोग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



