विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
मुख्यमंत्री सुक्खू के निर्देशों पर पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाई संयुक्त रणनीति

12 अक्तूबर, 2026
(Viren Thakur)
पड़ोसी राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों में हाल ही में हुई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने तथा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में आज पुलिस मुख्यालय, शिमला में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी की अध्यक्षता में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा को और मजबूत करना तथा विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान के लिए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नियमित एवं प्रभावी समन्वय स्थापित करना है।
बैठक की शुरूआत में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में हुई हालिया घटनाओं पर प्रस्तुति दी गई।
बैठक में विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा, प्रवेश एवं निकास पर निगरानी, आगंतुकों का सत्यापन, छात्रावासों की सुरक्षा तथा निजी सुरक्षा कर्मियों के पुलिस सत्यापन और नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेशभर में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। परिसरों तथा आसपास के क्षेत्रों में नशे की गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया।
किसी भी घटना के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने से रोकने के लिए पुलिस के साइबर क्राइम एवं मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय रखा जाएगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय एक अधिकृत प्रवक्ता नामित करेगा, ताकि सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
पुलिस-विश्वविद्यालय समन्वय, प्रत्येक विश्वविद्यालय एक नोडल सुरक्षा अधिकारी नामित करेगा, जो संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक के निरंतर संपर्क में रहेगा। विश्वविद्यालय परिसरों का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट तथा आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली भी विकसित की जाएगी।
पुलिस महानिदेशक ने विश्वविद्यालयों से यातायात स्वयंसेवक योजना, साइबर सुरक्षा जागरूकता, तकनीक के बेहतर उपयोग तथा एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में सक्रिय सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और पुलिस के बीच नियमित सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन करने की संभावना पर भी चर्चा की।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को इस सेवा तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा के बारे में जागरूक करने और पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़ने का आग्रह किया।

प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे और अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरा भरोसा हो। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने हालिया घटनाओं का संज्ञान लेते हुए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलकर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रयास है कि किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। विद्यार्थियों की सुरक्षा, उनका मानसिक स्वास्थ्य और उन्हें नशे तथा साइबर अपराधों से बचाना सबकी साझा जिम्मेदारी है।
पुलिस महानिदेशक ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पुलिस और विश्वविद्यालयों के बीच नियमित संवाद, आपसी विश्वास और सहयोग से प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में अधिक सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन से किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी समस्या की सूचना तुरंत 112 पर देने की अपील की।
बैठक में आईजी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, डीआईजी दक्षिणी रेंज, डीआईजी कानून एवं व्यवस्था, कमांडेंट प्रथम भारतीय आरक्षित वाहिनी तथा सोलन, शिमला, मंडी, बद्दी, कांगड़ा और ऊना के पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस विभाग से वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।



