हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में ‘नौतोड़’ भूमि बहाली की मांग: राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से की मुलाकात
वन संरक्षण अधिनियम 1980 को हटाने की अपील; नेगी बोले— "पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के लिए 20 बीघा तक भूमि आवंटन जरूरी।"

02/06/2026-VIDYA SAGAR
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास तथा स्थानीय निवासियों को उनका हक दिलाने के लिए राज्य सरकार ने एक बार फिर प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने सोमवार शाम लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से विशेष भेंट की।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान राजस्व मंत्री ने राज्यपाल से जनजातीय क्षेत्रों में पात्र स्थानीय लोगों को ‘नौतोड़ वन भूमि’ (Nautaur Land) की स्वीकृति प्रदान करने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने इस गंभीर विषय पर महामहिम को जमीनी हकीकत से अवगत कराया।
संविधान के शेड्यूल 5 के तहत राज्यपाल के पास है विशेष शक्ति
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कानूनी और संवैधानिक पक्षों को रखते हुए कहा कि नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति देने का अधिकार संविधान के शेड्यूल 5 (Schedule 5) के अंतर्गत सीधे राज्यपाल के पास निहित है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि जनजातीय क्षेत्रों के व्यापक हित में वन संरक्षण अधिनियम (FCA) 1980 के कड़े प्रावधानों को निरस्त या शिथिल किया जाए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों की युवा पीढ़ी को नौतोड़ भूमि का लाभ मिल सके।
“जनजातीय क्षेत्रों में लोगों के पास खेती और आजीविका के लिए भूमि बेहद सीमित है। रोजगार की कमी के कारण हमारी युवा पीढ़ी लगातार पलायन करने को मजबूर हो रही है। यदि पात्र परिवारों को नियमों के तहत 20 बीघा तक नौतोड़ भूमि आवंटित की जाती है, तो इससे उनकी आर्थिकी सुदृढ़ होगी और पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी।” — जगत सिंह नेगी, राजस्व मंत्री

पहले भी मिल चुकी है छूट, राज्यपाल ने दिया आश्वासन
-
पुरानी मिसालों का हवाला: कैबिनेट मंत्री ने अवगत करवाया कि इससे पहले भी प्रदेश के जनजातीय हितों को देखते हुए वर्ष 2014, 2016, और 2018 में एफसीए (FCA) 1980 के प्रावधानों को अस्थायी रूप से निरस्त किया गया था, जिससे हजारों गरीब व पात्र परिवारों को सीधा लाभ मिला था।
-
सरकार का रुख: उन्होंने कहा कि वर्तमान सुक्खू सरकार ने सत्ता संभालते ही वर्ष 2023 में ही केंद्र और संबंधित प्राधिकरणों से नौतोड़ भूमि आवंटन के मार्ग की बाधाएं हटाने का आग्रह किया था।

राज्यपाल का रुख: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने राजस्व मंत्री द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील और जनजातीय कल्याण से जुड़े विषय को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने इस मामले के सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर जल्द ही उचित व सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।



